अंबिकापुर [Nishanebaaz News]IPS Rahul Bansal Bribery Allegation Case। छत्तीसगढ़ के अंबिकापुर (सरगुजा) साइबर थाने में दर्ज 20.15 लाख रुपये के एक बड़े साइबर फ्रॉड केस की जांच के दौरान एक बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। मामले की जांच कर रहे अंबिकापुर सीएसपी व प्रशिक्षु आईपीएस राहुल बंसल पर हरियाणा निवासी शिकायतकर्ता/आरोपी आकाश कुमार ने 1 करोड़ रुपये की रिश्वत मांगने का गंभीर आरोप लगाया है।
मामला दिल्ली स्थित विशेष सीबीआई (CBI) अदालत तक पहुँचने के बाद हड़कंप मच गया है। हालांकि, सरगुजा रेंज के आईजी दीपक झा ने पूरे मामले में पुलिस का पक्ष स्पष्ट किया है।
IG का बयान: IPS के खिलाफ कोई ठोस सबूत नहीं
सरगुजा रेंज के आईजी दीपक झा के मुताबिक, अब तक की शुरुआती जांच में ट्रेनी आईपीएस राहुल बंसल की रिश्वत मांगने या किसी भी संलिप्तता का कोई सीधा साक्ष्य सामने नहीं आया है।
आईजी दीपक झा का स्पष्टीकरण:
“शिकायत में जिन मोबाइल नंबरों का उल्लेख है, वे राहुल बंसल के नहीं हैं। इसके अलावा वायरल ऑडियो में मौजूद आवाज भी आईपीएस राहुल बंसल की नहीं पाई गई है। हालांकि, शिकायत की निष्पक्ष जांच के लिए साइबर थाने में पदस्थ एएसआई प्रवीण कुमार राठौर और आरक्षक अंशुल शर्मा को पुलिस लाइन अटैच कर दिया गया है ताकि विवेचना प्रभावित न हो।”
क्या है पूरा मामला और रिश्वत के आरोप?
-
ठगी का मूल मामला: अंबिकापुर साइबर थाने में 20.15 लाख रुपये की ऑनलाइन ठगी का मामला दर्ज था, जिसमें अब तक देश के अलग-अलग राज्यों से 23 आरोपियों की गिरफ्तारी हो चुकी है।
-
CBI कोर्ट में परिवाद: इस मामले में आरोपी हरियाणा निवासी आकाश कुमार ने दिल्ली की विशेष सीबीआई अदालत में धारा 175(3) के तहत याचिका दायर की है।
-
हवाला से पैसे मांगने का दावा: आकाश ने आरोप लगाया कि कार्रवाई से बचाने और मामला दबाने के लिए 1 करोड़ रुपये की मांग की गई, जो हवाला नेटवर्क के जरिए पहुँचानी थी। उसने दावा किया कि एएसआई प्रवीण राठौर और आरक्षक अंशुल शर्मा ने इसमें मध्यस्थ की भूमिका निभाई।
-
कोर्ट ने मांगा जवाब: सीबीआई कोर्ट ने शिकायत पर संज्ञान लेते हुए आईपीएस राहुल बंसल, एएसआई प्रवीण राठौर और आरक्षक अंशुल शर्मा के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम (PCA) की धारा 7 व 7A तथा बीएनएस (BNS) 2023 की धाराओं में नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है।
न्यायालय के निर्देशों के तहत होगी आगे की कार्रवाई
सरगुजा पुलिस का कहना है कि ऑडियो, वीडियो और सभी संबंधित मोबाइल नंबरों की वैज्ञानिक जांच की जा रही है। चूंकि मामला वर्तमान में न्यायालय के समक्ष विचाराधीन है, इसलिए कोर्ट के निर्देशों और जांच में सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर आगे की वैधानिक कार्रवाई तय की जाएगी।






