Corruption Probe: सरकारी नौकरी की आड़ में ठेकेदारी? श्रम निरीक्षक पर पिता के नाम से फर्म बनाकर सरकारी टेंडर लेने के आरोप, सरकारी आवास के इस्तेमाल पर भी उठे सवाल

Anuj Nirala

Corruption Probe: सिंगरौली। मध्य प्रदेश के सिंगरौली जिले में पदस्थ श्रम निरीक्षक नवनीत पाण्डेय पर गंभीर आरोप लगने के बाद प्रशासनिक महकमे में हलचल मच गई है। आरोप है कि उन्होंने अपने पिता के नाम से एक निजी फर्म संचालित कराई और उसी फर्म के जरिए पीआईयू (PIU), नगर निगम, लोक निर्माण विभाग (PWD) सहित कई सरकारी विभागों के टेंडर हासिल किए। इतना ही नहीं, फर्म के स्थायी पते के रूप में सरकारी आवास का उपयोग किए जाने का भी दावा किया जा रहा है। यदि जांच में ये आरोप सही साबित होते हैं तो यह सरकारी सेवा नियमों, आचरण संहिता और हितों के टकराव (Conflict of Interest) का गंभीर मामला बन सकता है।

सरकारी आवास से संचालित होने के आरोप में घिरी फर्म

मामले में दावा किया जा रहा है कि श्रम निरीक्षक के पिता के नाम से पंजीकृत फर्म का स्थायी पता सरकारी आवास दर्शाया गया। आरोप है कि इसी फर्म के माध्यम से विभिन्न सरकारी विभागों में निर्माण और अन्य विकास कार्यों के टेंडर लिए गए। इस पूरे घटनाक्रम ने यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या कोई सरकारी कर्मचारी अपने परिजनों के नाम से व्यवसाय या ठेकेदारी कर सकता है? और क्या सरकारी आवास का उपयोग किसी निजी फर्म के कार्यालय के रूप में किया जा सकता है?

MP Crime: प्रेम प्रसंग का दर्दनाक अंत! जहरीला पदार्थ खाने से युवती की मौत, मौसी-भतीजे के रिश्ते ने खड़े किए बड़े सवाल

सरकारी टेंडरों को लेकर उठे कई सवाल

Corruption Probe: जानकारी के अनुसार, संबंधित फर्म को PIU, नगर निगम और PWD सहित कई विभागों में कार्य मिलने की बात सामने आ रही है। यदि जांच में यह तथ्य सही पाए जाते हैं, तो यह केवल सेवा नियमों के उल्लंघन का मामला नहीं होगा, बल्कि सरकारी व्यवस्था की पारदर्शिता पर भी गंभीर सवाल खड़े करेगा। अब यह जांच का विषय है कि टेंडर प्रक्रिया में सभी नियमों का पालन हुआ था या नहीं।

पहले भी हो चुकी है विभागीय कार्रवाई की चर्चा

सूत्रों के अनुसार, श्रम निरीक्षक नवनीत पाण्डेय के खिलाफ पहले भी विभागीय कार्रवाई हुई थी और उन्हें सेवा से बर्खास्त किए जाने की चर्चा रही। बाद में उन्होंने न्यायालय की शरण ली, जहां से उन्हें अंतरिम राहत मिली। हालांकि, इस प्रकरण में अंतिम न्यायिक निर्णय अभी लंबित है।

आधिकारिक पुष्टि और जांच का इंतजार

Corruption Probe: फिलहाल इस पूरे मामले में लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र और आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। श्रम निरीक्षक नवनीत पाण्डेय अथवा श्रम विभाग की ओर से भी अब तक कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है। ऐसे में आरोपों की सत्यता का निर्धारण सक्षम जांच एजेंसियों की जांच के बाद ही हो सकेगा।

दुकानदार सावधान, MP में कम तोलना पड़ेगा भारी! नए नियम में 1 लाख तक जुर्माने का प्रस्ताव

प्रशासन की भूमिका पर टिकी निगाहें

इस मामले के सामने आने के बाद अब सभी की नजरें जिला प्रशासन और श्रम विभाग की कार्रवाई पर हैं। यदि आरोपों में सच्चाई पाई जाती है, तो संबंधित अधिकारियों और जिम्मेदार व्यक्तियों के खिलाफ क्या कार्रवाई होगी, यह बड़ा सवाल है। वहीं यदि आरोप निराधार साबित होते हैं तो जांच से पूरी स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।फिलहाल यह मामला जांच और आधिकारिक पुष्टि का विषय है। प्रशासन की आगामी कार्रवाई से ही पूरे प्रकरण की वास्तविक तस्वीर सामने आएगी।

Share The News
Share This Article
Leave a Comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *