Thursday, September 10, 2026
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हर साल क्यों छोटी होती जा रही हैं फ्लाइट की सीटें? वजह जानकर रह जाएंगे हैरान

Airplane Economy Seat Size: हवाई जहाज की सीटें छोटी क्यों हो रही हैं यह सवाल आज लाखों यात्रियों के मन में है। अगर आपको भी लगता है कि इकोनॉमी क्लास में पहले के मुकाबले बैठना और पैर फैलाना मुश्किल हो गया है, तो यह सिर्फ आपका अनुभव नहीं है। पिछले कई दशकों में दुनिया भर की एयरलाइंस ने यात्रियों की सीटों का आकार और उनके बीच की दूरी लगातार कम की है। इसका असर अब केवल आराम तक सीमित नहीं रहा, बल्कि स्वास्थ्य और सुरक्षा पर भी चर्चा होने लगी है।

हवाई जहाज की सीटें छोटी क्यों हो रही हैं इसे समझने के लिए सीट पिच पर नजर डालना जरूरी है। 1980 और 1990 के दशक में इकोनॉमी क्लास में दो सीटों के बीच की दूरी आमतौर पर 34 से 35 इंच होती थी। अब अधिकांश एयरलाइंस में यह घटकर करीब 30 से 31 इंच रह गई है। कई लो-कॉस्ट एयरलाइंस में यह दूरी केवल 28 से 29 इंच तक पहुंच चुकी है।इतना ही नहीं, सीटों की चौड़ाई भी पहले की तुलना में कम हो गई है। मोटे कुशन वाली सीटों की जगह अब पतली और हल्की सीटों का इस्तेमाल किया जा रहा है।

इंसानों का शरीर बड़ा, लेकिन सीटें छोटी
हवाई जहाज की सीटें छोटी क्यों हो रही हैं इसका एक दिलचस्प पहलू यह भी है कि जिस समय सीटें छोटी हुई हैं, उसी दौरान लोगों की औसत लंबाई और शरीर का आकार बढ़ा है। कई शोध बताते हैं कि बैठने के दौरान शरीर की चौड़ाई पहले की तुलना में अधिक हो चुकी है। ऐसे में यात्रियों को पहले से कम जगह में सफर करना पड़ रहा है।

बोइंग और एयरबस विमानों में भी बढ़ी सीटों की संख्या
हवाई जहाज की सीटें छोटी क्यों हो रही हैं इसका जवाब विमान के अंदर सीटों की बढ़ती संख्या में भी मिलता है। पहले बोइंग 737 विमान में लगभग 120 से 130 सीटें होती थीं। अब कई एयरलाइंस उसी विमान में 180 से 190 यात्रियों के बैठने की व्यवस्था कर रही हैं।इसी तरह एयरबस A320 में भी पहले की तुलना में अधिक सीटें जोड़ी गई हैं। विमान का आकार लगभग समान है, लेकिन अंदर बैठने वाले यात्रियों की संख्या बढ़ गई है।
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ज्यादा लेगरूम अब अतिरिक्त सुविधा बन चुका है
हवाई जहाज की सीटें छोटी क्यों हो रही हैं इसका असर टिकट व्यवस्था पर भी दिखाई देता है। आज अगर किसी यात्री को ज्यादा लेगरूम चाहिए तो उसके लिए अलग से भुगतान करना पड़ता है। घरेलू उड़ानों में अतिरिक्त लेगरूम वाली सीटों के लिए कई एयरलाइंस ₹500 से ₹2,000 तक अतिरिक्त शुल्क लेती हैं। अंतरराष्ट्रीय उड़ानों में यह राशि और अधिक हो सकती है।एयरलाइंस कम बेस किराया दिखाकर यात्रियों को आकर्षित करती हैं और बाद में सीट चयन जैसी सुविधाओं से अतिरिक्त कमाई करती हैं।

एयरलाइंस क्यों अपना रही हैं यह मॉडल?
हवाई जहाज की सीटें छोटी क्यों हो रही हैं इसकी सबसे बड़ी वजह आर्थिक है। हवाई यात्रा पहले की तुलना में अधिक सुलभ और प्रतिस्पर्धी हो चुकी है। ऐसे में एयरलाइंस कम जगह में ज्यादा यात्रियों को बैठाकर अपनी आय बढ़ाना चाहती हैं।हल्की और पतली सीटों की मदद से विमान में एक या दो अतिरिक्त पंक्तियां जोड़ी जा सकती हैं, जिससे हर उड़ान में अधिक यात्रियों को जगह मिलती है और कंपनी की कमाई बढ़ती है।

क्या भविष्य में खड़े होकर करना पड़ेगा सफर?
हवाई जहाज की सीटें छोटी क्यों हो रही हैं इस बहस के बीच एक नया कॉन्सेप्ट भी चर्चा में है। इटली की कंपनी ने एक ऐसी स्टैंडिंग-स्टाइल सीट का डिजाइन पेश किया है, जिसमें यात्री पूरी तरह बैठने के बजाय सहारे के साथ यात्रा करता है।कंपनी का दावा है कि इससे विमान में करीब 20 प्रतिशत अधिक यात्रियों को बैठाया जा सकता है। हालांकि अभी तक किसी प्रमुख एयरलाइन ने इसे व्यावसायिक सेवा में शामिल नहीं किया है।

सुरक्षा को लेकर भी उठ रहे हैं सवाल
विशेषज्ञों का मानना है कि हवाई जहाज की सीटें छोटी क्यों हो रही हैं यह केवल सुविधा का विषय नहीं है। अगर विमान पूरी क्षमता से भरा होगा और सीटों के बीच जगह कम होगी, तो आपातकालीन स्थिति में यात्रियों को जल्दी बाहर निकालना चुनौती बन सकता है।इसी वजह से कई विमानन विशेषज्ञ यात्रियों की सुविधा और सुरक्षा के बीच संतुलन बनाए रखने की जरूरत पर जोर दे रहे हैं।

बदलते दौर में यात्रियों के सामने नई चुनौती
हवाई जहाज की सीटें छोटी क्यों हो रही हैं इसका सीधा असर हर उस व्यक्ति पर पड़ रहा है जो नियमित रूप से हवाई यात्रा करता है। सस्ती टिकटों के साथ यात्रा आसान जरूर हुई है, लेकिन आराम की जगह लगातार कम होती जा रही है। आने वाले समय में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि एयरलाइंस, नियामक संस्थाएं और यात्री इस बदलते ट्रेंड को किस तरह संतुलित करते हैं।

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