MPW Suspended:जमील खान \टीकमगढ़ \ मध्य प्रदेश के टीकमगढ़ जिले में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का दुरुपयोग कर सरकारी दस्तावेज तैयार करने का एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। स्वास्थ्य विभाग में पदस्थ एक कर्मचारी ने अपना तबादला रुकवाने के लिए प्रभारी मंत्री के नाम से कथित तौर पर फर्जी पत्र तैयार कर दिया। मामला कलेक्टर की सतर्कता से उजागर हुआ, जिसके बाद आरोपी कर्मचारी को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया। अब पूरे प्रकरण की जांच पुलिस अधीक्षक (SP) स्तर पर कराई जाएगी।
ट्रांसफर रुकवाने के लिए बनाया कथित फर्जी पत्र
जानकारी के अनुसार, स्वास्थ्य केंद्र गोर में पदस्थ एमपीडब्ल्यू (MPW) केएल बंशकार का 7 जुलाई 2026 को स्वास्थ्य केंद्र दरगुवां में तबादला किया गया था। आरोप है कि स्थानांतरण निरस्त कराने के उद्देश्य से उन्होंने प्रभारी मंत्री कृष्णा गौर के नाम से आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की मदद से एक कथित फर्जी पत्र तैयार किया।बताया गया कि इस पत्र में स्थानांतरण आदेश निरस्त करने के निर्देश दर्शाए गए थे।
सीएमएचओ के माध्यम से पहुंचा कलेक्टर तक
आरोपी कर्मचारी ने यह पत्र मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) डॉ. ओपी अनुरागी को सौंपा। सीएमएचओ ने पत्र की सत्यता की पुष्टि किए बिना उसे नोटशीट के साथ कलेक्टर विवेक श्रोत्रिय के पास अग्रेषित कर दिया।
एक शब्द की गलती से खुली पोल
MPW Suspended: कलेक्टर विवेक श्रोत्रिय ने पत्र का अवलोकन करते ही उसमें गड़बड़ी पकड़ ली। पत्र में प्रभारी मंत्री ‘कृष्णा गौर’ का नाम गलत तरीके से ‘कृण्णा गौर’ लिखा हुआ था। इसी त्रुटि ने कलेक्टर का संदेह बढ़ा दिया।कलेक्टर ने तत्काल दस्तावेज की जांच कराई, जिसमें सामने आया कि पत्र आधिकारिक नहीं था और कथित रूप से फर्जी तरीके से तैयार किया गया था।
कर्मचारी निलंबित, SP को सौंपी गई जांच
MPW Suspended: प्राथमिक जांच में मामला सही पाए जाने के बाद कलेक्टर विवेक श्रोत्रिय ने बुधवार को केएल बंशकार को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया।कलेक्टर ने बताया कि मामला प्रभारी मंत्री के नाम का दुरुपयोग करने से जुड़ा है, इसलिए इसकी विस्तृत जांच के लिए टीकमगढ़ पुलिस अधीक्षक (SP) को पत्र भेजा गया है। पुलिस अब यह पता लगाएगी कि इस कथित फर्जीवाड़े में केवल निलंबित कर्मचारी शामिल था या इसके पीछे कोई बड़ा नेटवर्क भी काम कर रहा था।
AI के दुरुपयोग पर फिर उठे सवाल
MPW Suspended: इस घटना ने एक बार फिर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के दुरुपयोग को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि आधुनिक तकनीक का उपयोग जहां सुविधाएं बढ़ा रहा है, वहीं इसका गलत इस्तेमाल सरकारी दस्तावेजों की विश्वसनीयता और प्रशासनिक व्यवस्था के लिए नई चुनौती बनता जा रहा है। फिलहाल पुलिस पूरे मामले की जांच में जुटी है।







