Major Action in Snakebite Scam: बिलासपुर। छत्तीसगढ़ के बिलासपुर जिले में करोड़ों रुपये के बहुचर्चित फर्जी सर्पदंश मुआवजा घोटाले (Fake Snakebite Compensation Scam) में बिलासपुर पुलिस को एक और बड़ी सफलता मिली है। गिरोह के साथ सांठगांठ और फर्जीवाड़े में संलिप्तता पाए जाने पर पुलिस ने दो और पुलिसकर्मियों को गिरफ्तार कर लिया है। इसके साथ ही इस पूरे घोटाले में अब तक कुल 19 आरोपियों की आधिकारिक गिरफ्तारी हो चुकी है।
मंगलवार (21 जुलाई 2026) को सामने आई इस कार्रवाई के बाद प्रशासनिक और पुलिस महकमे में हड़कंप मचा हुआ है। जांच एजेंसियों के मुताबिक, फर्जीवाड़े की यह आंच केवल पुलिसकर्मियों तक सीमित नहीं है, बल्कि पूर्व तहसीलदार और सिम्स (SIMS) अस्पताल के डॉक्टर भी इसके सीधे घेरे में हैं।
विधानसभा में गूंजा मुद्दा, फिर खुली फर्जीवाड़े की पोल
प्राप्त जानकारी के अनुसार, सामान्य मौतों को सर्पदंश (सांप के काटने) से हुई मौत बताकर शासन से मिलने वाली 4-4 लाख रुपये की आर्थिक सहायता राशि हड़पने का यह खेल काफी समय से चल रहा था। जब यह मुद्दा छत्तीसगढ़ विधानसभा (State Assembly) में जोर-शोर से उठा, तब जिला प्रशासन और पुलिस हरकत में आई।
नायब नाजिर की शिकायत पर बिलासपुर शहर के 6 प्रमुख थानों—सिविल लाइन, सरकंडा, कोनी, कोतवाली, तोरवा और सिरगिट्टी में फर्जीवाड़े के कुल 15 अलग-अलग मामलों में एफआईआर (FIR) दर्ज की गई। बिलासपुर एसएसपी (SSP) रजनेश सिंह ने तुरंत संज्ञान लेते हुए अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक (ASP) पंकज पटेल के नेतृत्व में एक विशेष जांच टीम का गठन किया, जिसने पुरानी फाइलों की नए सिरे से स्क्रूटनी शुरू की।
जानिए कैसे चलता था यह पूरा सिंडिकेट (फर्जीवाड़े का Modus Operandi)
पुलिस की अब तक की जांच में इस विशाल रैकेट का कथित मास्टरमाइंड वकील हीराप्रसाद खांडेकर निकला है। उसने अपना एक संगठित सिंडिकेट तैयार किया था, जिसमें तहसील कार्यालय के कर्मचारी, बैंक कर्मचारी, पुलिसकर्मी और डॉक्टर शामिल थे।
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शवों की तलाश: गिरोह के सदस्य जिले में होने वाली किसी भी सामान्य या प्राकृतिक मौत की जानकारी जुटाते थे।
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परिजनों को लालच: इसके बाद मृतक के परिजनों से संपर्क कर उन्हें सरकारी योजना के तहत मुआवजा दिलाने का झांसा दिया जाता था और बदले में कमीशन तय होता था।
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फर्जी दस्तावेज तैयार करना: मृतक का झूठा पंचनामा, फर्जी पोस्टमार्टम रिपोर्ट (Post-Mortem Report) और फर्जी शपथ पत्र तैयार कराए जाते थे।
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मुआवजा राशि की निकासी: तहसील कार्यालय में सेटिंग करके मुआवजे की राशि स्वीकृत कराई जाती थी और बैंक कर्मचारियों की मिलीभगत से नए खाते खुलवाकर रकम आपस में बांट ली जाती थी।
पूर्व तहसीलदार समेत कई बड़े चेहरे जांच के घेरे में, डॉक्टर फरार
वर्तमान में पुलिस की टीमें फरार चल रहे सीआईएमएस (SIMS) अस्पताल के डॉक्टर एस.एन. बोले की गिरफ्तारी के लिए अलग-अलग ठिकानों पर दबिश दे रही हैं, जिन पर फर्जी पोस्टमार्टम रिपोर्ट बनाने का आरोप है। इसके अलावा, तत्कालीन पूर्व तहसीलदार और अन्य राजस्व अधिकारियों की भूमिका की भी सूक्ष्मता से जांच की जा रही है।
बिलासपुर पुलिस अधिकारियों का कहना है कि जैसे-जैसे जांच का दायरा बढ़ रहा है, कई और सनसनीखेज खुलासे और बड़ी गिरफ्तारियां होना तय है।







