Friday, September 4, 2026
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Panic in Akaltara: पोड़ी दल्हा के सिंघरी तालाब में मिला साढ़े छह फीट लंबा मगरमच्छ; ग्रामीणों में मची दहशत

Panic in Akaltara: अकलतरा / जांजगीर-चांपा। छत्तीसगढ़ के जांजगीर-चांपा जिले के अंतर्गत आने वाले अकलतरा क्षेत्र के ग्राम पोड़ी दल्हा से एक सनसनीखेज और चौंकाने वाली खबर सामने आई है। यहाँ गांव के निस्तारी और प्रमुख सिंघरी तालाब में एक विशालकाय साढ़े छह फीट लंबा मगरमच्छ देखा गया। तालाब के पानी में मगरमच्छ के तैरने और किनारे पर आने की खबर जैसे ही गांव में फैली, ग्रामीणों के बीच भारी दहशत और हड़कंप का माहौल निर्मित हो गया।

ग्रामीणों ने अनहोनी की आशंका को देखते हुए तुरंत इसकी जानकारी स्थानीय वन विभाग के अधिकारियों को दी। सूचना मिलते ही वन विभाग की रेस्क्यू टीम आवश्यक साजो-सामान के साथ तत्काल मौके पर पहुंची और मुस्तैदी दिखाते हुए एक सफल रेस्क्यू ऑपरेशन को अंजाम दिया।

तालाब किनारे उमड़ी भीड़, रेस्क्यू टीम ने दिखाई सूझबूझ

सिंघरी तालाब में मगरमच्छ होने की पुष्टि के बाद ग्रामीणों की भारी भीड़ मौके पर जमा हो गई थी। सुरक्षा के मद्देनजर पुलिस और वन विभाग के कर्मचारियों ने पहले लोगों को तालाब के घाटों से दूर हटाया। इसके बाद वन विभाग के विशेषज्ञ रेस्क्यू दल ने जाल और रस्सियों की मदद से पानी के भीतर घेराबंदी शुरू की।

मगरमच्छ का वजन और लंबाई अत्यधिक होने के कारण उसे पकड़ने में टीम को काफी मशक्कत करनी पड़ी। लगभग घंटों की कड़ी मेहनत और सूझबूझ के बाद वन्यजीव को बिना किसी चोट या नुकसान के सुरक्षित रूप से पानी से बाहर निकाल लिया गया। मगरमच्छ के बाहर आते ही ग्रामीणों ने बड़ी राहत की सांस ली।

क्रोकोडायल पार्क ‘कोटमी सोनार’ में किया गया शिफ्ट

वन विभाग के अधिकारियों से मिली जानकारी के अनुसार, रेस्क्यू किए गए इस साढ़े छह फीट लंबे मगरमच्छ का स्वास्थ्य पूरी तरह से ठीक है। रेस्क्यू ऑपरेशन के तुरंत बाद कागजी औपचारिकताएं पूरी करते हुए मगरमच्छ को एक सुरक्षित वाहन के जरिए जिले के प्रसिद्ध और आधिकारिक मगरमच्छ संरक्षण केंद्र क्रोकोडायल पार्क कोटमी सोनार ले जाया गया, जहां उसे जलाशय में सुरक्षित छोड़ दिया गया है।

वन विभाग ने ग्रामीणों से अपील की है कि मानसून के इस मौसम में नदी-नालों और ग्रामीण तालाबों में जलस्तर बढ़ने के कारण जलीय जीवों के रिहायशी इलाकों की ओर आने की संभावना बढ़ जाती है। ऐसी स्थिति में स्वयं जोखिम उठाने या वन्यजीवों को नुकसान पहुंचाने के बजाय तुरंत प्रशासन और वन विभाग को सूचित करें।

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