Dindori Land Fraud: डिंडौरी जमीन घोटाला मामले में बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। मध्य प्रदेश के डिंडौरी जिले में करोड़ों रुपये की पैतृक जमीन को कथित तौर पर फर्जी दस्तावेजों के जरिए अपने नाम कराने और बेचने के आरोप में पुलिस ने मामला दर्ज किया है। मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (CJM) के आदेश के बाद कोतवाली थाना पुलिस ने जांच शुरू कर दी है।
डिंडौरी जमीन घोटाला मामले में शिकायतकर्ता इंद्रपाल सोनपाली की याचिका पर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट ने कार्रवाई के निर्देश दिए। इसके बाद पुलिस ने शिकायत में नामजद चार लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर ली। मामले की जांच अब पुलिस द्वारा की जा रही है।
पैतृक भूमि को लेकर पहले से चल रहा है विवाद
डिंडौरी जमीन घोटाला से जुड़े दस्तावेजों के अनुसार शिकायतकर्ता का आरोप है कि 6.79 हेक्टेयर पैतृक भूमि को लेकर वर्ष 2006 से हाईकोर्ट में मामला लंबित है। इसके बावजूद वर्ष 2022 में कथित तौर पर उनकी दादी के नाम से फर्जी वसीयत तैयार कर जमीन का नामांतरण करा लिया गया।
फर्जी हस्ताक्षर और शपथ पत्र बनाने का आरोप
डिंडौरी जमीन घोटाला में शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया है कि उनकी मां के फर्जी हस्ताक्षर कर शपथ पत्र तैयार किया गया। साथ ही अन्य कानूनी वारिसों को सूचना दिए बिना नामांतरण की प्रक्रिया पूरी कर ली गई। शिकायत में यह भी कहा गया है कि मकान, कुआं और पेड़ों वाली जमीन को दस्तावेजों में खाली भूमि दिखाकर दानपत्र तैयार किया गया।
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इन चार लोगों पर दर्ज हुआ मामला
डिंडौरी जमीन घोटाला मामले में पुलिस ने शिकायतकर्ता के चाचा नंदलाल सोनपाली, चचेरे भाई रोहित सोनपाली, तत्कालीन पटवारी हिरेन्द्र सूर्याम और तत्कालीन तहसीलदार गोविंदराम सलामे के खिलाफ मामला दर्ज किया है। इन सभी की भूमिका की जांच की जा रही है।
पुलिस कर रही दस्तावेजों की जांच
डिंडौरी जमीन घोटाला को लेकर पुलिस का कहना है कि मामले से जुड़े सभी राजस्व रिकॉर्ड, नामांतरण दस्तावेज, वसीयत और अन्य कागजात की गहन जांच की जा रही है। जांच के दौरान यदि नए तथ्य सामने आते हैं तो कानून के अनुसार अन्य धाराएं भी जोड़ी जा सकती हैं।
जांच के बाद सामने आ सकते हैं नए तथ्य
डिंडौरी जमीन घोटाला मामले में फिलहाल जांच जारी है। पुलिस का कहना है कि दस्तावेजों की सत्यता और संबंधित लोगों की भूमिका की पुष्टि के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी। मामले में लगाए गए आरोपों की जांच पूरी होने के बाद ही अंतिम निष्कर्ष सामने आएगा।
क्यों अहम है यह मामला?
डिंडौरी जमीन घोटाला ने पैतृक संपत्ति से जुड़े मामलों में दस्तावेजों की पारदर्शिता और कानूनी प्रक्रिया को लेकर कई सवाल खड़े किए हैं। अब इस मामले में पुलिस जांच और आगे की न्यायिक प्रक्रिया पर सभी की नजर बनी हुई है।







