CG Bharatmala Scam: छत्तीसगढ़ में भारतमाला मुआवजा घोटाले की आंच तेज: 11 जिलों तक बढ़ा जांच का दायरा, ED और EOW की रडार पर कई बिल्डर्स व अफसर

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CG Bharatmala Scam: रायपुर: छत्तीसगढ़ में भारतमाला परियोजना के तहत भूमि अधिग्रहण मुआवजे में हुए अरबों रुपये के कथित घोटाले की जांच का दायरा अब काफी बड़ा हो गया है। आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो और एंटी करप्शन ब्यूरो (EOW-ACB) की टीम वर्तमान में प्रदेश के 11 जिलों में भूमि अधिग्रहण मुआवजे से जुड़ी अनियमितताओं की गहन जांच कर रही है। वरिष्ठ अधिकारियों के मुताबिक, जांच का दायरा केवल रायपुर-विशाखापट्टनम भारतमाला परियोजना तक सीमित नहीं है, बल्कि अन्य जिलों की कड़ियों को भी जोड़ा जा रहा है और जल्द ही कुछ और जिलों में भी बड़ी कार्रवाई देखने को मिल सकती है।

एक दर्जन से अधिक राजस्व अधिकारियों पर गिर चुकी है गाज

इस पूरे महाघोटाले में रायपुर-विशाखापट्टनम भारतमाला सड़क परियोजना को लेकर सबसे ज्यादा शिकायतें दर्ज की गई थीं। शुरुआती जांच और गड़बड़ी की पुष्टि होने के बाद, ईओडब्ल्यू अब तक एक दर्जन से अधिक राजस्व अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ निलंबन व विभागीय कार्रवाई कर चुकी है। जांच एजेंसी इस मामले में कोर्ट में चालान भी पेश कर चुकी है। वहीं, इस मामले में मनी लॉन्ड्रिंग के इनपुट मिलने के बाद प्रवर्तन निदेशालय (ED) भी पूरी तरह सक्रिय है। ईडी की टीमों ने हाल ही में रायपुर और दुर्ग के कई बड़े कारोबारियों के ठिकानों पर छापेमारी कर वित्तीय लेन-देन के अहम दस्तावेज जब्त किए हैं।

ऐसे हुआ 43 करोड़ रुपये का फर्जीवाड़ा

दस्तावेजों के मुताबिक, रायपुर और धमतरी जिले के प्रभावित इलाकों के कुल 57 खसरों में अनियमितता की शिकायत हुई थी। शुरुआती जांच में इनमें से 20 खसरों में गंभीर गड़बड़ी पाई गई है, जिसके जरिए सरकारी खजाने से 43 करोड़ रुपये से अधिक का अतिरिक्त (अवैध) मुआवजा बांट दिया गया।

यह पूरा खुलासा आरटीआई (RTI) एक्टिविस्ट कृष्ण कुमार साहू की शिकायत और उनके द्वारा सौंपे गए साक्ष्यों के बाद हुआ है। शिकायत के अनुसार, गांधी, गुप्ता, गोलछा, राठी और अग्रवाल जैसे रसूखदार बिल्डर ग्रुप्स ने अधिकारियों से साठगांठ कर बड़ा खेल रचा। इन बिल्डरों ने मुआवजा हड़पने के लिए खुद को कागजों पर ‘किसान’ दिखाया। इसके बाद पटवारी और राजस्व अधिकारियों के साथ मिलकर प्रभावित कृषि भूमि की अवैध प्लॉटिंग कर दी और जमीन को छोटे-छोटे टुकड़ों (वर्गफीट) में विभाजित कर दिया, ताकि व्यावसायिक दर पर कई गुना अधिक मुआवजा हासिल किया जा सके।

राजनांदगांव, रायगढ़ और कोरबा भी रडार पर

सूत्रों के अनुसार, केवल रायपुर ही नहीं बल्कि राजनांदगांव, दुर्ग, रायगढ़ और कोरबा जिलों में भी भारतमाला परियोजना के तहत दिए गए मुआवजों की स्क्रूटनी चल रही है। रायगढ़ जिला प्रशासन ने करीब दो साल पहले ही मुआवजा वितरण में भारी विसंगतियां पकड़ी थीं और उच्चस्तरीय जांच की सिफारिश की थी, जिसे अब इस जांच में शामिल कर लिया गया है। अधिकारियों का साफ कहना है कि जैसे-जैसे बाकी बचे खसरों और राजस्व अभिलेखों की जांच आगे बढ़ेगी, घोटाले की यह राशि कई गुना ज्यादा बढ़ सकती है।

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