CG Low Water Paddy Varieties: कम पानी वाली धान की किस्में इन दिनों छत्तीसगढ़ के किसानों के बीच चर्चा का विषय बनी हुई हैं। हर साल कई इलाकों में किसानों को बारिश की कमी और सिंचाई की सीमित व्यवस्था के कारण फसल उत्पादन में नुकसान उठाना पड़ता है। ऐसे में कृषि विशेषज्ञ अब ऐसी धान किस्मों की सलाह दे रहे हैं जो कम पानी में भी अच्छा उत्पादन देने की क्षमता रखती हैं।यदि मानसून कमजोर पड़ जाए या खेतों में पर्याप्त पानी उपलब्ध न हो, तब भी कम पानी वाली धान की किस्में किसानों को बेहतर उत्पादन देने में मदद कर सकती हैं।
छत्तीसगढ़ को धान का कटोरा कहा जाता है, लेकिन कई क्षेत्रों में पानी की समस्या लगातार बढ़ रही है। ऐसे में कम पानी वाली धान की किस्में किसानों के लिए एक बेहतर विकल्प बनकर सामने आई हैं।विशेषज्ञों का कहना है कि सही किस्म का चयन करने से उत्पादन पर सूखे का असर काफी हद तक कम किया जा सकता है।
स्वर्ण श्रेया: सूखे में भी मजबूत प्रदर्शन
कम पानी वाली धान की किस्में में स्वर्ण श्रेया का नाम सबसे आगे माना जाता है। यह किस्म कम नमी और सीमित पानी की स्थिति में भी अच्छी बढ़वार करती है।किसानों का मानना है कि कम बारिश वाले क्षेत्रों में यह किस्म अपेक्षाकृत बेहतर उत्पादन देने की क्षमता रखती है।
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सीआर धान 201: कम अवधि में तैयार होने वाली किस्म
कम पानी वाली धान की किस्में में सीआर धान 201 भी तेजी से लोकप्रिय हो रही है। यह फसल करीब 110 से 115 दिनों में तैयार हो जाती है।कम सिंचाई वाले क्षेत्रों के लिए इसे उपयोगी माना जाता है। साथ ही यह कई सामान्य रोगों और कीटों के प्रति बेहतर सहनशीलता रखती है।
राजश्री: बदलते मौसम में भी भरोसेमंद
कम पानी वाली धान की किस्में की सूची में राजश्री का भी महत्वपूर्ण स्थान है। यह किस्म कम पानी और जरूरत पड़ने पर जलभराव जैसी परिस्थितियों को भी सहन करने की क्षमता रखती है।लगभग 145 से 150 दिनों में तैयार होने वाली यह फसल कई किसानों की पसंद बन रही है।
सुकारा-1: बारानी क्षेत्रों के लिए बेहतर विकल्प
कम पानी वाली धान की किस्में में सुकारा-1 खास तौर पर वर्षा आधारित खेती करने वाले किसानों के लिए उपयोगी मानी जाती है।इसकी एक बड़ी खासियत यह है कि यह ब्लास्ट जैसे रोगों के प्रति बेहतर प्रतिरोध क्षमता रखती है। सीधी बुवाई करने वाले किसान भी इस किस्म को प्राथमिकता दे रहे हैं।
कावेरी 468: कम समय में ज्यादा उत्पादन
कम पानी वाली धान की किस्में में कावेरी 468 को हाइब्रिड श्रेणी की लोकप्रिय किस्म माना जाता है।यह लगभग 120 से 130 दिनों में तैयार हो जाती है। कृषि जानकारों के अनुसार अनुकूल परिस्थितियों में यह प्रति एकड़ 30 से 35 क्विंटल तक उत्पादन देने की क्षमता रखती है।
बीज उपचार क्यों है जरूरी?
विशेषज्ञों का कहना है कि कम पानी वाली धान की किस्में लगाने से पहले बीज उपचार जरूर करना चाहिए।बीज उपचार से फसल की शुरुआती वृद्धि बेहतर होती है और कई बीमारियों का खतरा कम हो सकता है। इससे उत्पादन क्षमता बढ़ाने में भी मदद मिलती है।
किसानों के लिए क्या है सबसे बड़ा फायदा?
कम पानी वाली धान की किस्में उन किसानों के लिए राहत बन सकती हैं जो बारिश पर निर्भर खेती करते हैं।कम सिंचाई, कम लागत और बेहतर उत्पादन की संभावना इन किस्मों को खास बनाती है। यदि मौसम सामान्य से कमजोर भी रहे तो किसानों को पूरी तरह नुकसान झेलने की स्थिति नहीं बनती।
इस बार सही किस्म का चयन बना सकता है फर्क
कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि कम पानी वाली धान की किस्में भविष्य की खेती के लिए महत्वपूर्ण साबित हो सकती हैं। बदलते मौसम और घटते जलस्तर को देखते हुए किसानों को अब ऐसी फसलों की ओर ध्यान देना होगा जो कम संसाधनों में भी बेहतर परिणाम दे सकें।अगर इस खरीफ सीजन में बारिश को लेकर चिंता बनी हुई है, तो इन पांच धान किस्मों पर विचार करना किसानों के लिए फायदेमंद साबित हो सकता है।









