Monday, September 7, 2026
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Bacheli Displacement Dispute: बचेली टेलिंग डैम प्रभावितों के विस्थापन पर बवाल, पहले पुनर्वास की मांग को लेकर आंदोलन की चेतावनी

Bacheli Displacement Dispute: फकरे आलम खान/दंतेवाड़ा। बचेली स्थित टेलिंग डैम-1 के समीप पिछले बीस से चालिस वर्षों से निवासरत आदिवासी और श्रमिक परिवारों के विरुद्ध अनुविभागीय अधिकारी राजस्व बचेली द्वारा जारी बेदखली आदेश ने गंभीर संवैधानिक, कानूनी और मानवीय प्रश्न खड़े कर दिए हैं। बस्तर अधिकार मुक्ति मोर्चा एवं जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़ (जे) ने इस प्रशासनिक निर्णय का कड़ा विरोध किया है। संगठन का स्पष्ट मानना है कि किसी भी नागरिक की सुरक्षा सर्वोपरि है, किंतु सुरक्षा के नाम पर गरीब, आदिवासी एवं श्रमिक परिवारों को बिना किसी स्थायी पुनर्वास के विस्थापित करना सरासर अन्याय, संविधान और मानवीय मूल्यों के पूरी तरह खिलाफ है।

दशकों से खतरनाक डैम के नीचे लोगों को क्यों बसने दिया गया?

विपक्षी नेताओं रेमन मरकामी और रामनाथ नेगी ने संयुक्त बयान जारी कर एनएमडीसी और जिला प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने पूछा कि यदि प्रशासन स्वयं स्वीकार कर रहा है कि टेलिंग डैम-1 संभावित रूप से बेहद जोखिमपूर्ण क्षेत्र है, तो पिछले दशकों में इस डैम की सुरक्षा, तकनीकी स्थिति एवं जोखिम का समुचित मूल्यांकन क्यों नहीं किया गया? यदि डैम खतरनाक था तो एनएमडीसी ने समय रहते उचित पुनर्वास योजना क्यों नहीं बनाई और जिला प्रशासन व नगर पालिका बचेली ने प्रभावित परिवारों को वैकल्पिक आवास क्यों उपलब्ध नहीं कराया?

बीटीओ भवन को कार्रवाई से बाहर रखने पर उठे गंभीर सवाल

नेताओं ने पक्षपात का आरोप लगाते हुए कहा कि वन विभाग द्वारा बैलाडीला ट्रक ओनर्स एसोसिएशन यानी बीटीओ भवन को भी नोटिस जारी किया गया था, किंतु अनुविभागीय अधिकारी के अंतिम आदेश में उसका कोई उल्लेख नहीं किया गया है। क्या कानून केवल गरीबों और बेसहारा आदिवासियों के लिए है? यदि पूरा क्षेत्र ही जोखिमपूर्ण घोषित है तो सभी संरचनाओं पर समान मापदंड लागू होने चाहिए। बीटीओ भवन एवं अन्य व्यावसायिक संरचनाओं को जांच और कार्रवाई के दायरे से बाहर रखना प्रशासनिक अधिकारियों के चयनात्मक और पक्षपातपूर्ण रवैये को साफ उजागर करता है।

चौदह जून को प्रस्तावित कार्रवाई के खिलाफ जनआंदोलन का शंखनाद

प्रभावित परिवारों के समर्थन में संगठनों ने शासन के समक्ष ग्यारह सूत्रीय मांगें रखी हैं। इसमें चार जून के बेदखली आदेश पर तत्काल स्थगन लगाने, सेवानिवृत्त उच्च न्यायालय न्यायाधीश की अध्यक्षता में न्यायिक जांच आयोग गठित करने, आईआईटी और एनडीएमए जैसी विशेषज्ञ संस्थाओं से डैम की तकनीकी जांच कराने तथा प्रभावितों को भूमि सहित पक्का मकान, शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार सुरक्षा देने की मांग शामिल है। अंततः नेताओं ने चेतावनी दी है कि यदि चौदह जून की प्रस्तावित बेदखली कार्रवाई पर रोक नहीं लगाई गई, तो क्षेत्र में व्यापक और उग्र जनआंदोलन किया जाएगा।

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