Saturday, September 5, 2026
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Mahadev App Money Laundering: महादेव एप मनी लॉन्ड्रिंग केस: बिलासपुर हाईकोर्ट का बड़ा फैसला; फ्रीज किए गए ₹423 करोड़ के शेयर बेचने की मिली अनुमति

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Mahadev App Money Laundering: बिलासपुर; 04 जून 2026। छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित महादेव ऑनलाइन बुक सट्टा एप और उससे जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में बिलासपुर हाईकोर्ट ने एक बेहद महत्वपूर्ण और दूरगामी आदेश जारी किया है। हाईकोर्ट ने मामले से जुड़ी संदेही कंपनियों को बड़ी राहत देते हुए प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) द्वारा फ्रीज किए गए करीब 423 करोड़ रुपये मूल्य के शेयरों को बाजार में बेचने की अनुमति दे दी है। हालांकि, अदालत ने अपने आदेश में यह पूरी तरह स्पष्ट कर दिया है कि शेयरों को बेचने से प्राप्त होने वाली रकम पर संबंधित कंपनियों का कोई मालिकाना हक या नियंत्रण नहीं होगा। यह पूरी कवायद केवल शेयर बाजार के उतार-चढ़ाव से संपत्ति की वास्तविक वैल्यू को सुरक्षित रखने के लिए की गई है।

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जस्टिस रविंद्र कुमार अग्रवाल का अहम फैसला; म्यूचुअल फंड और सरकारी सिक्योरिटीज में पार्क होगा पैसा

हाईकोर्ट के जस्टिस रविंद्र कुमार अग्रवाल की सिंगल बेंच ने इस मामले की सुनवाई करते हुए कहा कि शेयर बाजार में लगातार उतार-चढ़ाव (Volatality) होता रहता है। यदि लंबे समय तक फ्रीज रहने के कारण इन शेयरों की कीमतें अचानक गिर जाती हैं, तो इससे संपत्ति को भारी आर्थिक नुकसान हो सकता है। इस संभावित नुकसान से बचने के लिए कोर्ट ने कंपनियों को यह विशेष छूट दी है कि वे इन फ्रीज्ड शेयरों को बेच सकती हैं। लेकिन, इससे प्राप्त होने वाली पूरी शत-प्रतिशत राशि को ईडी (ED) की कड़ी निगरानी में सुरक्षित म्यूचुअल फंड या सरकारी सिक्योरिटीज (Government Securities) में अनिवार्य रूप से पुन: निवेश करना होगा। कोर्ट ने कड़े लहजे में साफ किया कि पूरी राशि केंद्रीय एजेंसी के नियंत्रण में ही लॉक रहेगी और कंपनियां इसमें से एक भी रुपया निकाल नहीं सकेंगी।

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साल 2024 में ईडी ने फ्रीज किए थे आठ कंपनियों के डीमैट और ट्रेडिंग खाते

उल्लेखनीय है कि प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने वर्ष 2022 में महादेव ऑनलाइन सट्टा एप मामले में मनी लॉन्ड्रिंग का मुख्य केस दर्ज किया था। गहन तफ्तीश के दौरान जांच एजेंसी को पुख्ता इनपुट मिले थे कि सट्टेबाजी के जरिए कमाए गए कथित अवैध काले धन को कोलकाता के हवाला कारोबारी हरि शंकर टिबरेवाल और सूरज चोखानी के माध्यम से देश की विभिन्न मुखौटा (शेल) कंपनियों में डायवर्ट किया गया। ईडी के मुताबिक, इस बोगस रकम का एक बड़ा हिस्सा सीधे भारतीय शेयर बाजार (Stock Market) में निवेश के लिए उपयोग किया गया था। इसी आधार पर वित्तीय जांच एजेंसी ने 28 फरवरी 2024 को सख्त कार्रवाई करते हुए आठ बड़ी कंपनियों के डीमैट और ट्रेडिंग खाते पूरी तरह फ्रीज कर दिए थे। इन खातों में मौजूद शेयरों की कुल वैल्यू 29 फरवरी 2024 की स्थिति में करीब 423.60 करोड़ रुपये आंकी गई थी।

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‘ईडी कोई निवेश प्रबंधन एजेंसी नहीं, लेकिन संपत्ति का मूल्य बचाना जरूरी’

बिलासपुर हाईकोर्ट ने मामले की कानूनी बारीकियों पर सुनवाई करते हुए टिप्पणी की कि प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (PMLA) के तहत किसी भी संपत्ति को फ्रीज या अटैच करने का मूल उद्देश्य उस संपत्ति को पूरी तरह सुरक्षित रखना होता है। केवल कागजी तौर पर उस पर अधिकार बनाए रखना काफी नहीं है। यदि कानूनी प्रक्रिया के दौरान ही शेयर बाजार धड़ाम हो जाता है और संपत्ति की कीमत शून्य या बेहद कम हो जाती है, तो फ्रीज करने का मूल उद्देश्य ही निष्प्रभावी हो जाएगा। कोर्ट ने दूरदर्शी रुख अपनाते हुए कहा कि भविष्य में यदि कंपनियां केस जीतती हैं (संपत्ति वापस होती है) या सरकार अंततः संपत्ति को जब्त (Confiscate) करती है, दोनों ही विपरीत परिस्थितियों में संपत्ति की वास्तविक वैल्यू का सुरक्षित रहना बेहद जरूरी है। अदालत ने यह भी माना कि भले ही ईडी कोई व्यावसायिक निवेश प्रबंधन एजेंसी नहीं है, लेकिन वैधानिक रूप से संपत्ति का मूल्य बचाने के लिए ऐसी वैकल्पिक और सुरक्षित व्यवस्थाएं की जानी न्यायसंगत हैं।

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