Panagar BloodShed: पनागर में खूनी खेल, दहल उठा रैपुरा: छह बेखौफ बदमाशों ने दो सगे भाइयों पर तलवारों से किया जानलेवा हमला; पवन को आए 35 टांके, लकी का हुआ बड़ा ऑपरेशन

Panagar BloodShed: जबलपुर। संस्कारधानी जबलपुर के ग्रामीण थाना क्षेत्र पनागर के अंतर्गत आने वाले ग्राम रैपुरा में कानून व्यवस्था को ठेंगे पर रखकर छह बेखौफ बदमाशों द्वारा किए गए एक वीभत्स व खूनी विधिक संघर्ष का सनसनीखेज मामला सामने आया है। यहाँ धारदार तलवारों और बके जैसे घातक हथियारों से लैस होकर आए अपराधियों ने दो सगे भाइयों पर जानलेवा हमला (Attempt to Murder) कर उन्हें लहूलुहान कर दिया। इस कातिलाना हमले की विधिक संवेदनशीलता और क्रूरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि एक पीड़ित के शरीर पर डॉक्टरों को 35 टांके लगाने पड़े, जबकि दूसरे भाई की जान बचाने के लिए क्रिटिकल इमरजेंसी ऑपरेशन करना पड़ा।

इस रोंगटे खड़े कर देने वाले मामले में नया विधिक मोड़ तब आया जब गंभीर धाराओं के तहत नामजद मुख्य आरोपियों को महज 13 दिनों के भीतर विधिक जमानत (Bail) मिल गई। इसके बाद से पीड़ित परिवार और स्थानीय केवट समाज का गुस्सा भड़क उठा है और पुलिस की विधिक कार्यप्रणाली पर गंभीर उंगलियां उठने लगी हैं।

खूनी खेल की जमीनी हकीकत; सरेआम तलवारों से काटे गए पवन और लकी

पनागर पुलिस थाना क्षेत्र के ग्राम रैपुरा से प्राप्त आधिकारिक विधिक विवरण और केस डायरी के अनुसार, यह पूरी घटना उस वक्त घटित हुई जब पीड़ित भाई अपने दैनिक विधिक कार्यों में व्यस्त थे।

  • अचानक विधिक हमला: घात लगाकर आए छह कुख्यात हमलावरों ने पुरानी रंजिश या तात्कालिक विवाद को लेकर गाली-गलौज शुरू कर दी। पीड़ित पक्ष ने जब इसका विधिक प्रतिवाद किया, तो आरोपियों ने अपने पास छिपे तलवार और बके निकालकर ताबड़तोड़ वार करने शुरू कर दिए।

  • गंभीर शारीरिक क्षति: इस जानलेवा हमले में पवन केवट और लकी लवकुश केवट गंभीर रूप से जख्मी होकर तड़पने लगे। पवन के पूरे शरीर पर धारदार हथियारों के गहरे विधिक घाव थे, जिसके चलते डॉक्टरों को टांके लगाने पड़े। वहीं लकी के आंतरिक अंगों में गहरी चोट होने के कारण डॉक्टरों को तत्काल मेजर सर्जिकल ऑपरेशन का विधिक सहारा लेना पड़ा। दोनों पीड़ित मौत के मुंह से बमुश्किल बाहर आ पाए हैं।

पुलिस पर गंभीर आरोप: अस्पताल में समय पर बयान नहीं लिया; रसूखदारों को 13 दिन में मिली विधिक राहत

इस पूरे दंडात्मक प्रकरण में पीड़ितों के भाई सुमित केवट ने जबलपुर पुलिस और अभियोजन पक्ष के विधिक लूपहोल्स (कमियों) को उजागर करते हुए मीडिया के समक्ष गंभीर विधिक और कस्टमाइज्ड आरोप लगाए हैं। सुमित केवट के अनुसार:

  1. कमजोर पैरवी का विधिक आरोप: पनागर पुलिस ने इस मामले में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 109 (पूर्ववर्ती आईपीसी की धारा 307 – जानलेवा हमला) जैसी गैर-जमानती और कड़े विधिक प्रावधानों के तहत मुख्य आरोपी विशाल गोटिया, करन गोटिया, अभिषेक गोटिया एवं उनके अन्य तीन साथियों के खिलाफ नामजद विधिक प्राथमिकी (FIR) दर्ज की थी।

  2. इतिहास में पहली बार?: सुमित का विधिक तर्क है कि ऐसे जघन्य मामलों में जहाँ पीड़ित जिंदगी और मौत के बीच आईसीयू (ICU) में झूल रहा हो, आरोपियों को मात्र 13 दिनों के भीतर विधिक जमानत मिल जाना मध्य प्रदेश के प्रशासनिक इतिहास में विधिक रूप से हैरान करने वाला और संदेहास्पद है।

  3. बयान दर्ज करने में सुस्ती: परिजनों ने यह भी आरोप लगाया कि जब पीड़ित गंभीर हालत में अस्पताल के कस्टमाइज्ड बेड पर पड़े थे, तब पनागर थाने के विवेचनाधिकारी ने जानबूझकर समय पर उनके विधिक मरणासन्न कथन या मुख्य बयान (Statements) दर्ज नहीं किए, जिससे आरोपियों को विधिक रूप से न्यायालय में लाभ मिल गया।

न्याय की गुहार लेकर एसपी दफ्तर पहुंचे पीड़ित; एडिशनल एसपी सूर्यकांत शर्मा ने संभाली कमान

आरोपियों की जेल से विधिक रिहाई के बाद रैपुरा गाँव में दोबारा दहशत और गवाहों को डराने-धमकाने का माहौल बन गया है। न्याय न मिलता देख और जान का विधिक खतरा भांपते हुए पीड़ित पवन राकेश केवट और फरियादी सुमित केवट अपने समाज के प्रबुद्ध जनों के साथ जबलपुर के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (SSP/SP) कार्यालय पहुंचे और विधिक निष्पक्षता की गुहार लगाई।

मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए जबलपुर के एडिशनल एसपी (ASP) श्री सूर्यकांत शर्मा ने स्वयं पीड़ितों की कस्टमाइज्ड फाइलों और मेडिकल रिपोर्ट्स का विधिक परीक्षण किया। एडिशनल एसपी शर्मा ने आश्वस्त किया है कि मामले की विधिक विवेचना को पूरी तरह त्रुटिहीन (Flawless) बनाया जाएगा। यदि पनागर पुलिस के किसी अधिकारी द्वारा साक्ष्यों को छिपाने या बयान दर्ज करने में कोई विधिक ढिलाई बरती गई है, तो उसके खिलाफ भी दंडात्मक विभागीय विधिक कार्रवाई संस्थित की जाएगी। इसके साथ ही, पुलिस प्रशासन माननीय उच्च न्यायालय में आरोपियों की जमानत निरस्तीकरण (Cancellation of Bail) की विधिक अर्जी दाखिल करने पर भी कानूनी सलाह ले रहा है, ताकि पीड़ितों को त्वरित व सुरक्षित विधिक न्याय दिलाया जा सके।

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