Zero Tolerance Raigarh: गौरी शंकर गुप्ता/रायगढ़। छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जिले में नशे के अवैध सिंडिकेट और अवैध शराब के फलते-फूलते काले कारोबार के खिलाफ जिला पुलिस द्वारा चलाए जा रहे विशेष विधिक अभियान “ऑपरेशन आघात” को एक बहुत बड़ी और ऐतिहासिक विधिक सफलता प्राप्त हुई है। माननीय न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी (JMFC) घरघोड़ा श्री दामोदर प्रसाद चंद्रा के न्यायालय द्वारा दांडिक प्रकरण क्रमांक 151/2026 में त्वरित विधिक सुनवाई करते हुए अवैध महुआ शराब के एक बड़े तस्कर को 1 वर्ष के सश्रम कारावास (Rigorous Imprisonment) तथा ₹25,000 के विधिक अर्थदंड की दंडात्मक सजा से दंडित किया है। इस पूरे मामले की सबसे उल्लेखनीय और विधिक रूप से सराहनीय बात यह रही कि अपराध पंजीबद्ध होने के मात्र 2 महीने और 4 दिन के भीतर ही माननीय न्यायालय द्वारा संपूर्ण विधिक विचारण (Trial) पूर्ण कर अंतिम फैसला सुना दिया गया है, जिसने जिले के अपराधियों में खौफ पैदा कर दिया है।
15 मार्च को हुई थी विधिक शराब रेड; 70 लीटर महुआ शराब के साथ दबोचा गया था आरोपी
घरघोड़ा थाना और अभियोजन पक्ष से प्राप्त आधिकारिक विधिक विवरण के अनुसार, जिला वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (SSP) श्री शशि मोहन सिंह के कड़े निर्देशों के तहत 15 मार्च 2026 को ग्राम घरघोड़ी में एक बड़ी विधिक दबिश दी गई थी।
थाना प्रभारी घरघोड़ा निरीक्षक कुमार गौरव के कुशल रणनीतिक नेतृत्व में गठित विशेष पुलिस टीम ने मुखबिर की सूचना पर ग्राम घरघोड़ी में घेराबंदी कर आबकारी रेड की कार्रवाई को अंजाम दिया था। इस रेड के दौरान आरोपी कन्हैया लाल डनसेना (उम्र 31 वर्ष, निवासी ग्राम घरघोड़ी) को विधिक रूप से घेराबंदी कर दबोचा गया। स्वतंत्र गवाहों के समक्ष आरोपी के कब्जे से कुल 70 लीटर अवैध हाथ भट्टी महुआ शराब विधिवत जप्त की गई, जिसकी बाज़ार में अनुमानित विधिक कीमत लगभग ₹10,500 आंकी गई थी।
प्रधान आरक्षक अरविंद पटनायक की अचूक विवेचना और अभियोजन की सशक्त पैरवी
इस हाई-स्पीड विधिक ट्रायल को तार्किक परिणति तक पहुंचाने में पुलिस की वैज्ञानिक विवेचना शैली और सरकारी वकील की दलीलों की मुख्य भूमिका रही।
पंजीकरण एवं चालान: आरोपी के खिलाफ तत्काल थाना घरघोड़ा में अपराध क्रमांक 93/2026, धारा 34(2) आबकारी अधिनियम (Excise Act) के तहत गैर-जमानती दंडात्मक प्रकरण दर्ज कर उसे विधिक कस्टडी में जेल भेजा गया। विवेचनाधिकारी प्रधान आरक्षक अरविंद पटनायक ने तत्परता दिखाते हुए अभियोग पत्र (चार्जशीट) क्रमांक 59/2026 तैयार कर बिना समय गंवाए न्यायालय के पटल पर प्रस्तुत किया।
वैज्ञानिक व विधिक साक्ष्य: विवेचना के दौरान प्रधान आरक्षक पटनायक ने 6 महत्वपूर्ण चश्मदीद व स्वतंत्र गवाहों के विधिक कथन दर्ज किए तथा 11 कड़े दस्तावेजी व आर्टिकल साक्ष्य न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किए। माननीय न्यायालय में राज्य शासन और अभियोजन की ओर से सहायक जिला लोक अभियोजन अधिकारी (ADPO) श्री सत्यप्रकाश महिलाने द्वारा अत्यंत प्रभावी और अकाट्य विधिक पैरवी की गई। अभियोजन द्वारा प्रस्तुत गवाहों और रसायनी परीक्षण रिपोर्ट के साक्ष्य इतने प्रभावी थे कि बचाव पक्ष की तमाम विधिक दलीलें उनके सामने टिक नहीं सकीं और आरोपी के कब्जे से 70 लीटर शराब की जप्ती विधिक रूप से अकाट्य प्रमाणित पाई गई।
एसएसपी (SSP) शशि मोहन सिंह का कड़ा विधिक संदेश
इस त्वरित और न्यायसंगत फैसले के बाद रायगढ़ के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (SSP) श्री शशि मोहन सिंह ने जिले के नागरिकों और विशेषकर समाज विरोधी तत्वों के लिए एक बेहद कड़ा और स्पष्ट विधिक संदेश जारी किया है:
एसएसपी का आधिकारिक वक्तव्य: “ऑपरेशन आघात के तहत माननीय न्यायालय का यह त्वरित निर्णय जिला पुलिस की कार्यप्रणाली पर विधिक मुहर है। नशे के अवैध और घिनौने कारोबार में संलिप्त व्यक्तियों को मेरी अंतिम चेतावनी है कि वे ऐसे समाज विरोधी कृत्यों को तत्काल छोड़ दें और सम्मानपूर्वक समाज की मुख्यधारा से जुड़ें। रायगढ़ जिला पुलिस अब हर छोटे-बड़े मामलों में त्रुटिहीन और मजबूत विधिक साक्ष्यों (FSL/Digital Evidences) के साथ आरोपियों के खिलाफ कस्टमाइज्ड चार्जशीट न्यायालय में प्रस्तुत कर रही है। हमारा एकमात्र विधिक संकल्प जिले को पूरी तरह नशामुक्त बनाना और अपराधियों को उनके अंजाम तक पहुंचाकर कठोरतम दंडात्मक सजा दिलाना है। यह अभियान अनवरत जारी रहेगा।”









