नई दिल्ली। गुजरात की 10 गैर-मान्यता प्राप्त राजनीतिक पार्टियां चुनावी मैदान में बुरी तरह फिसड्डी साबित हुईं, लेकिन चंदा लेने में अव्वल रहीं। पिछले पांच सालों में इन पार्टियों ने कुल 4,300 करोड़ रुपये का चंदा जुटाया। हैरानी की बात यह है कि 2019 से 2024 के बीच इन पार्टियों ने केवल 43 उम्मीदवार उतारे और कुल 54 हजार वोट ही हासिल किए।
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चुनाव आयोग के सूत्रों ने स्पष्ट किया है कि आयोग के पास राजनीतिक दलों के चंदे के स्रोत और मात्रा की जांच करने का कोई कानूनी अधिकार नहीं है। भारतीय जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा 29(सी) के अनुसार, राजनीतिक दलों को वार्षिक रिपोर्ट चुनाव आयोग को सौंपनी होती है। लेकिन उसकी वित्तीय जांच का अधिकार केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (CBDT) के पास है।
खर्च और आमदनी में भारी विरोधाभास
- चुनावों में कुल खर्च दिखाया गया – 39 लाख रुपये
- वार्षिक ऑडिट रिपोर्ट में खर्च – 3,500 करोड़ रुपये
- कुल घोषित आमदनी (2019–24) – 4,300 करोड़ रुपये
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आयोग की सीमाएं
निर्वाचन आयोग केवल इतना कर सकता है कि यदि कोई गैर-मान्यता प्राप्त राजनीतिक दल (RUPP) लगातार छह साल चुनाव न लड़े या आय-व्यय का ब्योरा दाखिल न करे, तो उसकी पंजीयन रद्द कर सकता है।
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राहुल गांधी का आरोप
कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री और गृह मंत्री के गृह राज्य गुजरात का हवाला देते हुए आरोप लगाया है कि यहाँ ऐसी पार्टियां केवल चंदा लेने और धन शोधन (Money Laundering) का जरिया बन गई हैं।













