निशानेबाज न्यूज़ डेस्क : सर्दियों के मौसम में खान-पान की आदतें सीधे हमारी सेहत को प्रभावित करती हैं। खासकर चावल प्रेमियों के लिए यह खबर महत्वपूर्ण है। आयुर्वेद और चिकित्सकों के अनुसार, ठंड के मौसम में रात के वक्त चावल का सेवन गले और फेफड़ों में संक्रमण का कारण बन सकता है।
चावल की ठंडी तासीर और सर्दियों का मेल
चावल स्वाभाविक रूप से ठंडी तासीर वाला आहार है। जब इसे ठंडी रातों में खाया जाता है, तो यह शरीर के तापमान को असंतुलित कर सकता है और कफ दोष बढ़ा सकता है। रात में पाचन धीमा होता है, जिससे भारी और ठंडी तासीर वाली चीजें शरीर में बलगम जमा कर सकती हैं।
सांस और गले की समस्या
जिन लोगों को अस्थमा, ब्रोंकाइटिस या साइनस की समस्या है, उनके लिए रात में चावल खाना फेफड़ों में कफ जमा कर सकता है। इसके अलावा चावल से शरीर में नमी बढ़ती है, जिससे गले में खराश और सर्दी-जुकाम जैसी समस्याएं बढ़ सकती हैं।
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पाचन और भारीपन की परेशानी
रात में शरीर की शारीरिक गतिविधियां कम होती हैं, जिससे चावल का पचाना कठिन हो जाता है। इसका असर सुबह उठने पर भारीपन और थकान के रूप में महसूस होता है।
चावल खाने का सही समय और तरीका
चावल पूरी तरह से छोड़ने की आवश्यकता नहीं है। विशेषज्ञों का कहना है कि सर्दियों में दोपहर के समय चावल का सेवन बेहतर रहेगा, क्योंकि उस समय मेटाबॉलिज्म तेज होता है और सूरज की गर्मी ठंडक को कम कर देती है।
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हमेशा ताजे और गर्म चावल ही खाएं।
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चावल में लौंग, काली मिर्च या तेजपत्ता जैसे गर्म मसाले डालें।
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रात के भोजन में दलिया, खिचड़ी या बाजरे जैसी गर्म तासीर वाली चीजें शामिल करें।
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यदि चावल ही खाना है, तो सोने से कम से कम 3-4 घंटे पहले खाएं और मात्रा सीमित रखें।













