West Bengal Elections : नई दिल्ली/कोलकाता। बिहार विधानसभा चुनाव में मिली ऐतिहासिक जीत के बाद भारतीय जनता पार्टी ने अपना पूरा फोकस अब पश्चिम बंगाल पर शिफ्ट कर दिया है। पार्टी ने आगामी विधानसभा चुनाव को देखते हुए राज्य में संगठन का नया और आक्रामक रोडमैप तैयार किया है। इसके तहत पूरे पश्चिम बंगाल को रणनीतिक रूप से 5 जोन में बांटा गया है और 12 बड़े नेताओं (6 संगठन मंत्री और 6 वरिष्ठ नेता) को अगले 5 महीनों के लिए ग्राउंड जीरो पर तैनात कर दिया गया है।
5 महीने, 5 जोन और बूथ स्तर पर फोकस बीजेपी के केंद्रीय नेतृत्व ने तय किया है कि ये 12 दिग्गज नेता अगले 5 महीने तक बंगाल में ही डेरा डालेंगे। इनका मुख्य काम बूथ स्तर पर संगठन को मजबूत करना, टीएमसी (TMC) के गढ़ में सेंध लगाना और स्थानीय कार्यकर्ताओं में जोश भरना होगा।
छत्तीसगढ़ के पवन साय को अहम जिम्मेदारी बीजेपी के इस मेगा प्लान में छत्तीसगढ़ को भी बड़ी जगह मिली है। छत्तीसगढ़ बीजेपी के संगठन महामंत्री पवन साय को पश्चिम बंगाल के राधबंगा जोन (पुरुलिया और बर्धमान) की जिम्मेदारी सौंपी गई है। उनके साथ उत्तराखंड के कैबिनेट मंत्री धन सिंह रावत भी इस मोर्चे पर डटे रहेंगे। यह इलाका बीजेपी के लिए रणनीतिक रूप से काफी महत्वपूर्ण माना जाता है।
West Bengal Elections : किस जोन में कौन संभालेगा मोर्चा? देखें पूरी लिस्ट:
बीजेपी ने जोन-वार अनुभवी नेताओं की टीम बनाई है, जो सीधे केंद्रीय नेतृत्व को रिपोर्ट करेंगे:
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राधबंगा जोन (पुरुलिया-बर्धमान):
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प्रभारी: पवन साय (संगठन मंत्री, छत्तीसगढ़)
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सहयोगी: धन सिंह रावत (कैबिनेट मंत्री, उत्तराखंड)
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हावड़ा–हुगली–मेदिनीपुर (सुवेंदु अधिकारी का गढ़):
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प्रभारी: पवन राणा (संगठन मंत्री, दिल्ली)
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सहयोगी: संजय भाटिया (हरियाणा) और जेपीएस राठौर (मंत्री, यूपी)।
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नोट: यह जोन राजनीतिक रूप से सबसे संवेदनशील माना जाता है।
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कोलकाता महानगर और दक्षिण 24 परगना (TMC का अभेद किला):
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प्रभारी: एम. सिद्धार्थन (संगठन मंत्री, हिमाचल प्रदेश)
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सहयोगी: सी.टी. रवि (पूर्व राष्ट्रीय महासचिव)।
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नवद्वीप और उत्तर 24 परगना:
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प्रभारी: एन. माधुकर (संगठन मंत्री, आंध्र प्रदेश)
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सहयोगी: सुरेश राणा (मंत्री, उत्तर प्रदेश)।
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नोट: सीमावर्ती इलाका होने के कारण यहाँ घुसपैठ और सुरक्षा के मुद्दे अहम रहेंगे।
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उत्तर बंगाल (मालदा–सिलीगुड़ी):
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प्रभारी: अनंत नारायण मिश्रा (अरुणाचल) और अरुण बिन्नाडी (कर्नाटक)।
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सहयोगी: कैलाश चौधरी (पूर्व केंद्रीय मंत्री)।
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नोट: उत्तर बंगाल बीजेपी का पारंपरिक गढ़ रहा है, जिसे पार्टी और मजबूत करना चाहती है।
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क्या है बीजेपी का लक्ष्य? पार्टी सूत्रों के मुताबिक, इस कवायद का मकसद 2026 के चुनावों से पहले एक मजबूत ‘ग्राउंड नेटवर्क’ तैयार करना है। पार्टी चाहती है कि बाहरी राज्यों के अनुभवी नेताओं और स्थानीय नेतृत्व के तालमेल से एक ऐसी चुनावी मशीनरी तैयार की जाए जो ममता बनर्जी की टीएमसी को कड़ी टक्कर दे सके।
बॉक्स मैटर (Highlights):
- रणनीति: 5 जोन, 5 महीने का सघन अभियान।
- चेहरे: दूसरे राज्यों के 6 संगठन मंत्री और 6 कद्दावर नेता।
- मकसद: बूथ कमेटियों को सक्रिय करना और जनसंपर्क बढ़ाना।













