HomeNationalKolkataममता या आर.एन. रवि... बंगाल में विधानसभा भंग होने के बाद किसके...

ममता या आर.एन. रवि… बंगाल में विधानसभा भंग होने के बाद किसके हाथ में है सत्ता? समझिए पूरा संवैधानिक गणित

Date:

Related stories

West Bengal constitutional crisis after assembly dissolution : पश्चिम बंगाल की राजनीति इस समय बड़े संवैधानिक मोड़ पर खड़ी दिखाई दे रही है। विधानसभा भंग होने के बाद राज्य में यह सवाल तेजी से उठ रहा है कि आखिर अब प्रशासनिक और राजनीतिक नियंत्रण किसके हाथ में है। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने इस्तीफा नहीं दिया है, लेकिन राज्यपाल द्वारा विधानसभा भंग किए जाने के बाद स्थिति पूरी तरह बदल चुकी है।राज्य में नई सरकार के शपथ ग्रहण तक की अवधि को लेकर संविधान और संवैधानिक प्रक्रियाओं पर बहस तेज हो गई है।

विधानसभा भंग होने का क्या होता है मतलब?

भारतीय संविधान के अनुच्छेद 172 के अनुसार किसी भी राज्य विधानसभा का कार्यकाल सामान्य रूप से पांच वर्ष का होता है। कार्यकाल समाप्त होने या विधानसभा भंग होने के बाद पुरानी सरकार का संवैधानिक आधार कमजोर हो जाता है।

विशेषज्ञों के अनुसार लोकतांत्रिक सरकार का अस्तित्व विधानसभा के बहुमत पर टिका होता है। जब सदन ही अस्तित्व में नहीं रहता, तब सरकार की वैधानिक स्थिति भी प्रभावित होती है।

क्या इस्तीफा न देने से मुख्यमंत्री बने रह सकते हैं?

संवैधानिक जानकारों का कहना है कि मुख्यमंत्री का पद केवल राजनीतिक घोषणा से सुरक्षित नहीं रहता। अनुच्छेद 164 के मुताबिक मुख्यमंत्री वही माना जाता है जिसे विधानसभा में बहुमत का समर्थन प्राप्त हो।

यदि विधानसभा भंग हो चुकी है और राज्यपाल ने नई प्रक्रिया शुरू कर दी है, तो केवल इस्तीफा न देने भर से मुख्यमंत्री पद पर बने रहना संभव नहीं माना जाता।

नई सरकार बनने तक कौन संभालता है प्रशासन?

नई सरकार के शपथ ग्रहण तक राज्य में प्रशासनिक मशीनरी पूरी तरह बंद नहीं होती। मुख्य सचिव, गृह विभाग, पुलिस और अन्य अधिकारी सीमित दायरे में नियमित काम करते रहते हैं।

इस दौरान राज्यपाल की भूमिका महत्वपूर्ण हो जाती है। वे संवैधानिक प्रमुख के तौर पर यह सुनिश्चित करते हैं कि शासन व्यवस्था में कोई खालीपन न आए।

क्या यह राष्ट्रपति शासन जैसी स्थिति है?

संवैधानिक विशेषज्ञ साफ करते हैं कि यह राष्ट्रपति शासन नहीं है। राष्ट्रपति शासन अनुच्छेद 356 के तहत लागू होता है, जिसके लिए अलग संवैधानिक प्रक्रिया जरूरी होती है।

बंगाल की वर्तमान स्थिति को सामान्य संवैधानिक संक्रमण काल माना जा रहा है, जहां पुरानी सरकार से नई सरकार को सत्ता हस्तांतरण की प्रक्रिया चल रही है।

संक्रमण काल में किन फैसलों पर रोक रहती है?

इस अवधि में बड़े नीतिगत फैसले, भारी वित्तीय मंजूरी, बड़े प्रशासनिक फेरबदल या संवेदनशील आदेश सामान्यतः नहीं लिए जाते। केवल जरूरी प्रशासनिक और सार्वजनिक सेवाओं से जुड़े कार्य जारी रहते हैं।

राज्यपाल की भूमिका क्यों अहम हो जाती है?

जब मंत्रिपरिषद प्रभावी रूप से अस्तित्व में नहीं रहती, तब राज्यपाल यह तय करते हैं कि किस दल या गठबंधन को सरकार बनाने के लिए आमंत्रित किया जाए। साथ ही वे प्रशासनिक निरंतरता बनाए रखने की जिम्मेदारी निभाते हैं।

नई सरकार के शपथ के बाद क्या होगा?

नई सरकार के शपथ लेते ही राज्य की कार्यकारी शक्तियां नए मुख्यमंत्री और मंत्रिपरिषद के पास चली जाएंगी। तब प्रशासनिक और राजनीतिक फैसले लेने का अधिकार भी नई सरकार को मिल जाएगा।

Share The News

Subscribe

- Never miss a story with notifications

- Gain full access to our premium content

- Browse free from up to 5 devices at once

Latest stories

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here