रायपुर : कांग्रेस नेता विकास तिवारी को झीरम घाटी नक्सल कांड को लेकर दिए गए विवादित बयानों के बाद लगातार एक के बाद एक बड़े झटके झेलने पड़ रहे हैं। पार्टी की आधिकारिक लाइन से अलग जाकर बयान देने के चलते कांग्रेस ने उनके खिलाफ सख्त रुख अपनाया है।
पहले उन्हें कांग्रेस के वरिष्ठ प्रवक्ता पद से हटाया गया, इसके बाद पार्टी ने अनुशासनहीनता का हवाला देते हुए उन्हें कांग्रेस की प्राथमिक सदस्यता से निष्कासित कर दिया। अब इस कड़ी में एक और बड़ी कार्रवाई करते हुए राज्यसभा सांसद रंजीता रंजन ने विकास तिवारी को अपने सांसद प्रतिनिधि पद से भी हटा दिया है।
सूत्रों के मुताबिक, झीरम घाटी नक्सल हमले को लेकर विकास तिवारी के बयान न सिर्फ पार्टी की आधिकारिक सोच से अलग थे, बल्कि इससे संगठन की छवि को भी नुकसान पहुंचा। कांग्रेस नेतृत्व ने इसे गंभीर अनुशासनहीनता मानते हुए पहले संगठनात्मक और अब राजनीतिक स्तर पर पूरी तरह किनारे कर दिया है।
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राज्यसभा सांसद रंजीता रंजन की ओर से यह कदम ऐसे समय में उठाया गया है, जब कांग्रेस संगठन आगामी चुनावी रणनीति और आंतरिक एकजुटता पर खासा फोकस कर रही है। पार्टी यह स्पष्ट संकेत देना चाहती है कि संवेदनशील मुद्दों पर पार्टी लाइन से हटकर बयान देने वालों के लिए कोई जगह नहीं है।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि विकास तिवारी के लिए यह फैसला बड़ा झटका है, क्योंकि सांसद प्रतिनिधि का पद उनके लिए राजनीतिक सक्रियता और पहुंच का अहम जरिया था। अब लगातार हुई कार्रवाइयों के बाद उनका कांग्रेस में भविष्य लगभग अंधकारमय माना जा रहा है।
सांसद प्रतिनिधि पद से हटाया जाना बड़ी चोट
राज्यसभा सांसद रंजीता रंजन द्वारा सांसद प्रतिनिधि पद से हटाया जाना विकास तिवारी के लिए एक और बड़ा राजनीतिक झटका माना जा रहा है। यह पद राजनीतिक सक्रियता, प्रशासनिक संपर्क और संगठन में प्रभाव बनाए रखने के लिहाज से काफी अहम होता है।
कांग्रेस में भविष्य पर सवाल
लगातार तीन बड़ी कार्रवाइयों के बाद विकास तिवारी का कांग्रेस में भविष्य लगभग अनिश्चित नजर आ रहा है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यह कार्रवाई न सिर्फ एक व्यक्ति पर, बल्कि पूरे संगठन के लिए अनुशासन का स्पष्ट संदेश है।













