Vice Presidential Post : नक्सल पीड़ितों की चीख दिल्ली तक पहुंची, शांति समिति ने कहा – रेड्डी को वोट देना पीड़ा को बढ़ावा देना

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Vice Presidential Post : नई दिल्ली। इंडिया ब्लॉक के उपराष्ट्रपति पद के उम्मीदवार और पूर्व जस्टिस बी. सुदर्शन रेड्डी का विरोध तेज हो गया है। राजधानी दिल्ली के कॉन्स्टीट्यूशन क्लब में शुक्रवार को बस्तर शांति समिति ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर सांसदों से अपील की कि वे सुदर्शन रेड्डी को समर्थन न दें। समिति और नक्सल पीड़ितों ने आरोप लगाया कि सुप्रीम कोर्ट में जज रहते हुए रेड्डी ने 2011 में सलवा जुडूम पर प्रतिबंध लगाया था, जिससे बस्तर में नक्सलवाद और भी तेज़ हुआ।

पीड़ितों ने सुनाई आपबीती

प्रेस कॉन्फ्रेंस में मौजूद नक्सल हिंसा से पीड़ित लोगों ने भावुक होकर अपने अनुभव साझा किए।

  • सियाराम रामटेके, जो नक्सली हमले में दिव्यांग हो गए, बोले – “अगर सलवा जुडूम पर बैन नहीं लगता तो शायद मैं आज सामान्य जिंदगी जी रहा होता।”
  • केदारनाथ कश्यप ने बताया कि उनके भाई की 2011 के बाद निर्मम हत्या कर दी गई। “नक्सलियों ने मेरे भाई का पेट चीरकर आंतें बाहर निकाल दीं। अगर सलवा जुडूम चलता रहता तो शायद 2014 तक नक्सली बस्तर से भाग चुके होते।”
  • शहीद जवान मोहन उइके की विधवा पत्नी आरती उइके ने कहा कि “सलवा जुडूम बंद होने के बाद ही मेरे पति की हत्या हुई।”

समिति के तीखे आरोप

बस्तर शांति समिति के जयराम ने कहा कि नक्सल पीड़ित अपनी पीड़ा लेकर दिल्ली आए हैं, ताकि सांसद यह समझें कि सुदर्शन रेड्डी जैसे व्यक्ति को समर्थन देना बस्तर के जख्मों पर नमक छिड़कने जैसा होगा।
समिति के सदस्य मंगऊ राम कावड़े ने आरोप लगाया – “रेड्डी के फैसले की वजह से हजारों परिवार तबाह हुए। उनके हाथ बस्तर के निर्दोष लोगों के खून से रंगे हैं।”

चुनावी सियासत गरमाई

उपराष्ट्रपति चुनाव से पहले यह विवाद विपक्ष के लिए नई चुनौती बन गया है। विपक्षी गठबंधन इंडिया ब्लॉक ने बी. सुदर्शन रेड्डी को उम्मीदवार बनाया है और आम आदमी पार्टी समेत कई दल उन्हें समर्थन दे चुके हैं। वहीं, बीजेपी लगातार रेड्डी को “नक्सल समर्थक” करार दे रही है।

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