कानपुर [Nishanebaaz News]। देश में जालसाजी और वित्तीय धोखाधड़ी के मामले लगातार सामने आ रहे हैं, जिसमें निर्दोष और कम आय वाले लोग शिकार बन रहे हैं। ऐसा ही एक चौंकाने वाला मामला उत्तर प्रदेश के कानपुर शहर से सामने आया है, जहां मात्र 10 हजार रुपये प्रतिमाह का वेतन पाने वाले एक सिक्योरिटी गार्ड को केंद्रीय वस्तु एवं सेवा कर (CGST) विभाग द्वारा 3 करोड़ 15 लाख रुपये के कर भुगतान का कानूनी नोटिस थमा दिया गया है।
17.48 करोड़ रुपये के कपड़ा कारोबार का दिखाया गया लेखा-जोखा मामले की विस्तृत पृष्ठभूमि के अनुसार, पीड़ित सुरक्षाकर्मी ओमजी शुक्ला कानपुर में सिक्योरिटी गार्ड का कार्य कर अपना और अपने परिवार का भरण-पोषण करते हैं। उन्हें अगस्त 2025 में सीजीएसटी (CGST) विभाग की ओर से एक नोटिस प्राप्त हुआ। इस नोटिस में उनके नाम पर 17 करोड़ 48 लाख रुपये का कपड़ा कारोबार पंजीकृत दर्शाया गया था और इसी आधार पर 3 करोड़ 15 लाख रुपये का बकाया टैक्स चुकाने का फरमान जारी किया गया।
एक साल से दफ्तरों के चक्कर काटने को मजबूर पीड़ित नोटिस मिलने के बाद से पीड़ित ओमजी शुक्ला अत्यधिक मानसिक तनाव में हैं। उनका कहना है कि 10 हजार रुपये महीने की नौकरी करने वाला व्यक्ति इतने विशाल पैमाने पर व्यापार कैसे संचालित कर सकता है? उनके कतिपय व्यक्तिगत दस्तावेजों का दुरुपयोग कर किसी अज्ञात गिरोह द्वारा फर्जी फर्म का गठन कर इतने बड़े वित्तीय घोटाले को अंजाम दिया गया है। पिछले एक वर्ष से वे अधिकारियों और विभागीय चक्कर काट रहे थे, परंतु कोई ठोस समाधान नहीं निकल पा रहा था।
पुलिस कमिश्नर ने दिए प्राथमिक दर्ज कर जांच के निर्देश लगातार होती परेशानी से तंग आकर पीड़ित ने अंततः कानपुर पुलिस कमिश्नर के समक्ष उपस्थित होकर न्याय की गुहार लगाई। पूरे मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस कमिश्नर ने तत्काल प्रभाव से प्राथमिक दर्ज करने और मामले की उच्चस्तरीय जांच के आदेश जारी किए हैं। पुलिस अब इस बात की पड़ताल कर रही है कि पीड़ित के दस्तावेजों का किस प्रकार दुरुपयोग किया गया और इस फर्जीवाड़े के पीछे कौन सा संगठित गिरोह सक्रिय है।
न्याय की उम्मीद में पीड़ित, जांच प्रक्रिया शुरू कमिश्नर के कड़े रुख और त्वरित कार्रवाई के आदेश के बाद पीड़ित सुरक्षाकर्मी ने प्रशासनिक सहयोग के लिए धन्यवाद ज्ञापित किया है। पुलिस और साइबर सेल अब फर्जी व्यापारिक खातों तथा जीएसटी रजिस्ट्रेशन की पड़ताल कर रही है, ताकि इस पूरे नेटवर्क का भंडाफोड़ कर निर्दोष गार्ड को इस भारी वित्तीय देनदारी से मुक्ति दिलाई जा सके।





