वॉशिंगटन/तेहरान : मध्य पूर्व में जारी तनाव के बीच अमेरिका ने बड़ा सैन्य कदम उठाते हुए होर्मुज जलडमरूमध्य के पास ईरानी तट पर स्थित मिसाइल ठिकानों पर हमला किया है। अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) के अनुसार, यह कार्रवाई अंतरराष्ट्रीय जहाजों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के उद्देश्य से की गई।
CENTCOM ने बताया कि इन ठिकानों पर तैनात एंटी-शिप क्रूज मिसाइलें वैश्विक शिपिंग के लिए बड़ा खतरा बन रही थीं। हमले में 5000 पाउंड के बंकर बस्टर बमों का इस्तेमाल किया गया।
शिपिंग सुरक्षा के नाम पर कार्रवाई
अमेरिकी सेना का कहना है कि इस ऑपरेशन का मुख्य उद्देश्य होर्मुज स्ट्रेट में सुरक्षित और निर्बाध जहाजों की आवाजाही बनाए रखना है।ईरान और इजरायल के बीच बढ़ते संघर्ष के बाद इस क्षेत्र में खतरा काफी बढ़ गया था, जिसके चलते अमेरिका ने यह कदम उठाया।
Read More : छत्तीसगढ़ विधानसभा बजट सत्र का आज 13वां दिन, कई अहम मुद्दों पर होगी चर्चा, आज हंगामा संभव
होर्मुज में बढ़ा डर, जहाजों की आवाजाही प्रभावित
हमले के बाद होर्मुज जलडमरूमध्य में डर का माहौल बन गया है। कई अंतरराष्ट्रीय जहाजों ने इस मार्ग से गुजरने से बचना शुरू कर दिया है।सेटेलाइट तस्वीरों के अनुसार, कई जहाज समुद्र में खड़े होकर स्थिति सामान्य होने का इंतजार कर रहे हैं।
क्या है होर्मुज स्ट्रेट का महत्व?
होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया का सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों में से एक है, जहां से वैश्विक तेल आपूर्ति का लगभग 20 प्रतिशत हिस्सा गुजरता है।
भारत समेत कई देशों की ऊर्जा आपूर्ति इसी मार्ग पर निर्भर करती है, ऐसे में यहां किसी भी तरह का तनाव वैश्विक अर्थव्यवस्था पर सीधा असर डाल सकता है।
ईरान का पहले से दावा
ईरान पहले ही यह दावा कर चुका है कि उसने होर्मुज स्ट्रेट को पूरी तरह बंद नहीं किया है, लेकिन अमेरिका और इजरायल से जुड़े जहाजों को खतरा बताया था।इसके बावजूद क्षेत्र में सैन्य गतिविधियों के कारण तनाव लगातार बढ़ता जा रहा है।
विशेषज्ञों की चेतावनी
रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि ईरान की सैन्य क्षमता और रणनीतिक स्थिति को देखते हुए यह संघर्ष लंबा खिंच सकता है।पूर्व अमेरिकी सैन्य अधिकारी जॉन स्पेंसर के अनुसार, इस क्षेत्र में भूमिगत मिसाइल साइट, ड्रोन और बोट बेस जैसे खतरे हमेशा बने रहते हैं, जिन्हें खत्म करना आसान नहीं है।
वैश्विक असर की आशंका
इस हमले के बाद अमेरिका ने स्पष्ट किया है कि उसका लक्ष्य ऊर्जा आपूर्ति और वैश्विक व्यापार को सुरक्षित रखना है।हालांकि, बढ़ते तनाव के चलते तेल की कीमतों, शिपिंग और अंतरराष्ट्रीय बाजार पर बड़ा असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है।











