नई दिल्ली : अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बुधवार को एक अहम मेमोरेंडम पर हस्ताक्षर करते हुए अमेरिका को दर्जनों अंतरराष्ट्रीय संगठनों और समझौतों से बाहर निकालने का ऐलान किया। ट्रंप प्रशासन का कहना है कि ये संस्थाएं अमेरिका के आर्थिक हितों, संप्रभुता और नीति-निर्माण की स्वतंत्रता के खिलाफ काम कर रही थीं। यह कदम ट्रंप की बहुचर्चित ‘अमेरिका फर्स्ट’ नीति के तहत उठाया गया है, जिसमें राष्ट्रीय हितों को वैश्विक प्रतिबद्धताओं से ऊपर रखा गया है।
66 संस्थाओं से अलग होगा अमेरिका
व्हाइट हाउस की जानकारी के मुताबिक, अमेरिका कुल 66 अंतरराष्ट्रीय संगठनों से बाहर निकल रहा है। इनमें 35 गैर-संयुक्त राष्ट्र संगठन और 31 संयुक्त राष्ट्र से संबद्ध संस्थाएं शामिल हैं। ट्रंप प्रशासन ने इन संस्थाओं को “अमेरिका-विरोधी”, “अप्रभावी” और “फिजूलखर्ची वाला” करार दिया है।
गैर-यूएन संगठनों में भारत और फ्रांस की अगुवाई वाला इंटरनेशनल सोलर अलायंस (ISA), इंटरनेशनल यूनियन फॉर कंजर्वेशन ऑफ नेचर (IUCN) और इंटरगवर्नमेंटल पैनल ऑन क्लाइमेट चेंज (IPCC) जैसे बड़े पर्यावरण संगठन भी शामिल हैं।
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विदेश मंत्री मार्को रूबियो का बयान
अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो ने सोशल मीडिया पर फैसले की पुष्टि करते हुए कहा कि राष्ट्रपति ट्रंप ने उन संगठनों से बाहर निकलने का निर्णय लिया है, जो अमेरिका के खिलाफ काम करते हैं या जिन पर बेवजह करदाताओं का पैसा खर्च हो रहा है। उन्होंने कहा कि कुछ अन्य अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं की भूमिका की समीक्षा अभी जारी है।
रूबियो के मुताबिक, यह फैसला अमेरिकी जनता से किए गए वादों को पूरा करने की दिशा में अहम कदम है और इससे “ग्लोबलिस्ट नौकरशाहों” को मिलने वाला फंड रोका जाएगा।
इन प्रमुख UN संस्थाओं से भी अलगाव
संयुक्त राष्ट्र से जुड़ी जिन प्रमुख संस्थाओं से अमेरिका बाहर हो रहा है, उनमें डिपार्टमेंट ऑफ इकोनॉमिक एंड सोशल अफेयर्स, इंटरनेशनल लॉ कमीशन, इंटरनेशनल ट्रेड सेंटर, पीसबिल्डिंग कमीशन, यूएन एनर्जी, यूएन पॉपुलेशन फंड और यूएन वॉटर शामिल हैं।
अमेरिकी एजेंसियों को तत्काल निर्देश
मेमोरेंडम में सभी अमेरिकी विभागों और एजेंसियों को निर्देश दिए गए हैं कि वे इन संगठनों से अलग होने की प्रक्रिया जल्द पूरी करें। संयुक्त राष्ट्र से जुड़ी संस्थाओं के मामले में, अमेरिका कानूनी सीमाओं के भीतर रहते हुए उनकी फंडिंग और भागीदारी समाप्त करेगा। ट्रंप प्रशासन का मानना है कि इन संस्थाओं में बने रहना अमेरिका के राष्ट्रीय और आर्थिक हितों के खिलाफ था।











