निशानेबाज न्यूज़ डेस्क : स्वदेशी लड़ाकू विमान तेजस लाइट कॉम्बैट एयरक्राफ्ट (LCA) Mk1A को लेकर बड़ी और अहम जानकारी सामने आई है। हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) ने संकेत दिए हैं कि भारतीय वायु सेना को लंबे समय से प्रतीक्षित यह फाइटर जेट अब जल्द ही मिल सकता है। HAL के मुताबिक, तेजस Mk1A के पांच विमान पूरी तरह तैयार हैं और इस वित्तीय वर्ष में डिलीवरी की दिशा में काम तेज कर दिया गया है।
IAF की स्क्वाड्रन कमी में मिलेगी राहत
भारतीय वायु सेना इस समय गंभीर स्क्वाड्रन संकट से गुजर रही है। जहां स्वीकृत संख्या 42 फाइटर स्क्वाड्रन की है, वहीं वर्तमान में सिर्फ 29 स्क्वाड्रन ही सक्रिय हैं। पुराने MiG-21 विमानों की रिटायरमेंट के बाद यह कमी और गहरी हो गई है। ऐसे में तेजस Mk1A की तैनाती IAF की परिचालन क्षमता को मजबूती देगी।
Read More : IPS Transfer Madhya Pradesh: 14 IPS अधिकारियों का तबादला, संजय कुमार बने भोपाल के नए पुलिस कमिश्नर
इंजन सप्लाई की बाधा अब दूर
तेजस Mk1A की डिलीवरी में सबसे बड़ी रुकावट GE Aerospace के F404 इंजन की सप्लाई में देरी थी। HAL के अनुसार, यह समस्या अब काफी हद तक सुलझ चुकी है। पांच विमानों में इंजन फिट किए जा चुके हैं और फायरिंग व मिसाइल ट्रायल्स सफल रहे हैं। शेष तकनीकी परीक्षण जल्द पूरे होने की उम्मीद है।
तेजस Mk1A को बनाते हैं घातक फीचर्स
Mk1A वेरिएंट पुराने तेजस Mk1 से कहीं ज्यादा उन्नत है। इसमें शामिल हैं:
-
AESA रडार
-
एडवांस इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर सिस्टम
-
आधुनिक एवियोनिक्स
-
एयर-टू-एयर रिफ्यूलिंग क्षमता
ये सभी खूबियां इसे चीन और पाकिस्तान के लड़ाकू विमानों के मुकाबले बेहद प्रभावशाली बनाती हैं।
आत्मनिर्भर भारत की दिशा में बड़ा कदम
HAL को तेजस Mk1A के 83 विमानों का पक्का ऑर्डर मिल चुका है, जबकि कुल ऑर्डर संख्या 180 तक जा सकती है। यह प्रोजेक्ट भारत को रक्षा उत्पादन में आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक निर्णायक कदम माना जा रहा है। अगर सभी प्रक्रियाएं समय पर पूरी होती हैं, तो मार्च 2026 तक पहले तेजस Mk1A वायुसेना में शामिल हो सकते हैं।













