नई दिल्ली। Nishaanebaz.com-ChatGPT Story: आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) को लेकर दुनिया भर में अक्सर नौकरियों के नुकसान, गलत जानकारियों के प्रसार और कॉपीराइट जैसे संवेदनशील मुद्दों पर चर्चा होती है। हालांकि, तकनीक का एक सकारात्मक और मानवीय पहलू भी है जो लोगों की जिंदगी बदल रहा है। ऐसा ही एक बेहद भावुक मामला सामने आया है, जहां एआई चैटबॉट ‘ChatGPT’ ने एक व्यक्ति को 66 साल से बिछड़े उसके परिवार और बहन से मिलाने में ऐतिहासिक मदद की है। दशकों की असफल कोशिशों के बाद, एआई द्वारा दिए गए एक छोटे से सुराग ने इस बिछड़े परिवार को फिर से एक कर दिया।
कनाडा में रहने वाले अवतार सिंह का बचपन पंजाब के अमृतसर में बीता था। 1960 के दशक में उन्हें पता चला कि जिनका पालन-पोषण वे अपनी मां की छत्रछाया में समझ रहे थे, वे वास्तव में उनकी दादी थीं। उनके पिता कनाडा चले गए थे, जबकि उनकी असली मां साविंदर किसी कारणवश भारत छोड़कर विदेश चली गई थीं। अवतार के पास अपनी मां के बारे में केवल इतनी ही सीमित जानकारी थी कि वे अफ्रीका या ब्रिटेन में कहीं रहती थीं। अपनी मां और उनके परिवार को ढूंढने के लिए अवतार सिंह ने गूगल, फेसबुक और कई अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स का सहारा लिया, लेकिन सालों की कोशिशों के बावजूद उनके हाथ केवल निराशा ही लगी।
मई 2026 में फ्रांस यात्रा के दौरान अवतार सिंह ने पहली बार ChatGPT से इस मामले में मदद मांगने का विचार किया। उन्होंने चैटजीपीटी को बहुत कम जानकारियां दीं—जैसे मां का नाम साविंदर, उनकी संभावित उम्र (87 से 97 वर्ष के बीच), और भारत, अफ्रीका व ब्रिटेन से उनका संबंध। उपलब्ध ऑनलाइन डेटा और डिजिटल आर्काइव्स का विश्लेषण करते हुए ChatGPT ने कुछ ही घंटों में एक महत्वपूर्ण सुराग ढूंढ निकाला। एआई ने उन्हें ‘निक्की धामू’ द्वारा लिखे गए एक लेख तक पहुंचाया, जिसमें 1962 का धारीवाल संस्थान से जारी सिलाई का प्रमाण पत्र संलग्न था। धारीवाल ही अवतार सिंह का जन्मस्थान था, जिसने इस सुराग की सत्यता पर मुहर लगा दी।
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इस प्रमाण पत्र के आधार पर अवतार ने लेख में दिए गए संपर्क के जरिए निक्की से बात की। बातचीत के दौरान निक्की ने बताया कि उनकी मां की भारत में पहली शादी से एक बेटा था, जिसका बचपन का नाम ‘टिटू’ था। यह सुनते ही अवतार सिंह भावुक हो गए, क्योंकि ‘टिटू’ उन्हीं का बचपन का नाम था। उन्हें तुरंत अहसास हो गया कि निक्की ही उनकी सगी बहन हैं। इसके तुरंत बाद अवतार सिंह अपनी पत्नी के साथ लंदन पहुंचे और 66 साल बाद अपनी बहन निक्की व परिवार के अन्य सदस्यों से मुलाकात की। यह घटना दर्शाती है कि अगर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का सही और विवेकपूर्ण इस्तेमाल किया जाए, तो यह हमारे जीवन में न केवल जटिल समस्याओं का समाधान कर सकती है बल्कि मानवीय संवेदनाओं को भी जोड़ सकती है।





