Tag: Chhuikhadan Police Clarification

  • Komal Janghel News Khairagarh : चरित्र हनन की राजनीति का शिकार हुए जंघेल: रमन सिंह के करीबी नेता के खिलाफ किसने रची झूठी खबर की साजिश? जांच की मांग

    Komal Janghel News Khairagarh : चरित्र हनन की राजनीति का शिकार हुए जंघेल: रमन सिंह के करीबी नेता के खिलाफ किसने रची झूठी खबर की साजिश? जांच की मांग

    Komal Janghel News Khairagarh : राजनांदगांव/खैरागढ़ (27 फरवरी 2026): खैरागढ़ विधानसभा क्षेत्र के लोकप्रिय नेता, दो बार के विधायक और पूर्व संसदीय सचिव कोमल जंघेल के राजनीतिक करियर को धूमिल करने की एक बड़ी साजिश का पर्दाफाश हुआ है। पिछले चार दिनों से मीडिया और सोशल मीडिया के माध्यम से उन पर किसी अज्ञात महिला के देह शोषण का आरोप लगाया जा रहा था, लेकिन वास्तविकता यह है कि छुईखदान थाने में उनके खिलाफ ऐसी कोई रिपोर्ट दर्ज ही नहीं हुई है।

    छवि खराब करने का संगठित प्रयास कोमल जंघेल खैरागढ़ की राजनीति के एक ऐसे स्तंभ हैं जिन्होंने राजमहल के अभेद्य गढ़ को तोड़कर जमीन से जुड़े कार्यकर्ता की पहचान बनाई। डॉ. रमन सिंह के करीबी माने जाने वाले जंघेल की लोकप्रियता को पचा पाने में विफल कुछ विरोधियों ने उनकी सामाजिक और राजनीतिक साख पर कीचड़ उछालने के लिए ‘देह शोषण’ जैसे गंभीर लेकिन झूठे आरोपों का सहारा लिया।

    प्रशासन और संगठन की चुप्पी पर सवाल इस पूरे घटनाक्रम में सबसे दुर्भाग्यपूर्ण पहलू पुलिस प्रशासन और राजनीतिक संगठनों की चुप्पी रही। जब सोशल मीडिया पर लगातार भ्रामक खबरें चलाई जा रही थीं, तब पुलिस ने इसका खंडन करना उचित नहीं समझा। वहीं, भाजपा संगठन और समाज के कुछ पदाधिकारियों ने भी थाने जाकर वास्तविकता जानने की कोशिश नहीं की, जिससे एक समर्पित कार्यकर्ता के मान-सम्मान को अपूरणीय क्षति पहुँची।

    संघर्ष समिति ने किया खंडन मामले में मोड़ तब आया जब किसान अधिकार संघर्ष समिति ने एक बयान जारी कर स्पष्ट किया कि कोमल जंघेल पर लगाए गए आरोप पूरी तरह असत्य और निराधार हैं। समिति ने उन चर्चाओं का भी खंडन किया जिनमें किसी महिला पदाधिकारी द्वारा FIR कराने की बात कही जा रही थी। इस खुलासे के बाद अब यह मांग उठ रही है कि आखिर किसके इशारे पर और किस मंशा से यह ‘फेक न्यूज’ फैलाई गई, इसकी उच्च स्तरीय जांच होनी चाहिए।

    जननायक के रूप में पहचान 1986 से पार्टी के लिए समर्पित जंघेल वर्तमान में भाजपा ओबीसी मोर्चा की राष्ट्रीय कार्यकारिणी के सदस्य हैं। एक ठेठ किसान नेता के रूप में उनकी पहचान हर वर्ग में है। जानकारों का मानना है कि आने वाले समय में उनकी बढ़ती पकड़ को कमजोर करने के लिए ही इस प्रकार की घिनौनी साजिश रची गई थी।