Monday, September 28, 2026
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Viral Audio Case: सरगुजा में कथित ‘ऑडियो टेप’ कांड से भड़की सियासी चिंगारी: भाजपा महापौर पर 3 लाख की वसूली का आरोप; जांच के लिए एसपी की शरण में कांग्रेस

Viral Audio Case: अंबिकापुर। सरगुजा संभाग के मुख्यालय अंबिकापुर नगर निगम में ‘मीना बाजार’ की अनुमति के नाम पर हुए कथित लेन-देन के एक वायरल ऑडियो ने शहर की आबो-हवा में सियासी भूचाल ला दिया है। सोशल मीडिया पर तेजी से प्रसारित हो रहे इस कथित ऑडियो में अंबिकापुर की प्रथम नागरिक व भाजपा महापौर मंजूषा भगत और भाजपा जिलाध्यक्ष भारत सिंह सिसोदिया पर सीधे तौर पर तीन लाख रुपये की अवैध वसूली के गंभीर आरोप लगाए गए हैं। इस सनसनीखेज खुलासे के बाद जहां मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस ने पूरी ताकत से मोर्चा खोलते हुए निष्पक्ष विधिक जांच की मांग तेज कर दी है, वहीं महापौर ने इसे एक आदिवासी महिला जनप्रतिनिधि के खिलाफ सोची-समझी राजनीतिक साजिश करार देते हुए ऑडियो को पूरी तरह कूटरचित और फर्जी बताया है।

ठेकेदार के कथित दावों से हड़कंप, सत्यता की आधिकारिक पुष्टि का इंतजार

प्रशासनिक और राजनैतिक गलियारों से छनकर आ रही जानकारी के मुताबिक, यह पूरा विवाद शहर में मीना बाजार लगाने की प्रशासनिक अनुमति दिलाने के एवज में हुए कथित वित्तीय व्यवहार से जुड़ा है। बताया जा रहा है कि यह ऑडियो कथित तौर पर स्थानीय ठेकेदार अनुराग मिश्रा की ओर से जारी या लीक किया गया है, जिसमें संगठन और निगम सत्ता से जुड़े शीर्ष चेहरों का नाम घसीटा गया है। हालांकि, सरगुजा पुलिस और सायबर सेल की ओर से इस वायरल ऑडियो की तकनीकी सत्यता, वॉइस सैंपलिंग और प्रामाणिकता की अभी तक कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है, लेकिन इसके तेवर ने स्थानीय राजनीति के पारे को सातवें आसमान पर पहुंचा दिया है।

भावुक होकर अजाक थाने पहुंचीं महापौर, कहा— “आदिवासी होने के कारण बदनाम करने की साजिश”

मामले की गंभीरता और विवाद को बढ़ता देख महापौर मंजूषा भगत ने स्वयं आक्रामक रुख अख्तियार किया है। वे तत्काल अनुसूचित जाति-जनजाति (अजाक) थाने पहुंचीं और इस भ्रामक ऑडियो को तैयार करने व उसे सोशल मीडिया पर प्रसारित कर छवि धूमिल करने वाले तत्वों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की लिखित मांग की। इस दौरान मीडिया से मुखातिब होते हुए महापौर मंजूषा भगत अत्यंत भावुक हो गईं। उन्होंने रोते हुए कहा कि उन्हें सिर्फ इसलिए निशाना बनाया जा रहा है क्योंकि वे एक आदिवासी महिला हैं और कतिपय विरोधी तत्व उनके राजनीतिक बढ़ते कद को पचा नहीं पा रहे हैं, इसलिए यह पूरा षड्यंत्र रचा गया है।

कांग्रेस ने कहा— “सच्चे हैं तो जांच से डर क्यों?”; आज पुलिस कप्तान से मुलाकात करेगी टीम

इधर, कांग्रेस पार्टी ने महापौर के भावुकता और राजनीतिक साजिश वाले बयानों को सिरे से खारिज कर दिया है। नगर निगम के नेता प्रतिपक्ष शफी अहमद के नेतृत्व में कांग्रेस का एक उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल शनिवार को ही अजाक थाना पहुंचा और थाना प्रभारी से मुलाकात कर इस कथित घूसखोरी कांड की निष्पक्ष जांच की मांग उठाई। नेता प्रतिपक्ष शफी अहमद ने तीखा प्रहार करते हुए कहा कि जब शहर के सर्वोच्च पद पर बैठे व्यक्ति पर भ्रष्टाचार के सीधे आरोप लग रहे हों, तो उसकी जांच होना अत्यंत आवश्यक है। अगर ऑडियो फर्जी है तो दूध का दूध और पानी का पानी हो जाएगा, और यदि आरोप सही हैं तो सख्त धाराओं में केस दर्ज होना चाहिए।

हालांकि, अजाक थाना प्रभारी ने तकनीकी कारणों और क्षेत्राधिकार (Jurisdiction) का हवाला देते हुए मामले को संबंधित थानों में ले जाने की सलाह दी। इस विधिक अड़चन के बाद कांग्रेस प्रतिनिधिमंडल ने रणनीति बदलते हुए रविवार को सीधे सरगुजा पुलिस अधीक्षक (SP) से मुलाकात करने का निर्णय लिया है, ताकि मामले को विशेष जांच दल (SIT) या संबंधित थाना क्षेत्र में भेजकर त्वरित जांच शुरू कराई जा सके। फिलहाल, अंबिकापुर की जनता और राजनीतिक विश्लेषकों की निगाहें पुलिस प्रशासन के अगले कदम पर टिकी हैं।

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