Tuesday, September 29, 2026
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Stray Dogs Case : आवारा कुत्तों पर SC की सख्त टिप्पणी, शेल्टर की कमी पर जताई गंभीर चिंता

निशानेबाज न्यूज़ डेस्क : सुप्रीम कोर्ट में आवारा कुत्तों से जुड़े मामलों पर गुरुवार को लगातार दूसरे दिन करीब ढाई घंटे तक सुनवाई हुई। इस दौरान अदालत में कुत्तों के व्यवहार, नागरिकों की सुरक्षा, नगर निगमों की जिम्मेदारी और एनिमल वेलफेयर से जुड़े कई अहम मुद्दों पर विस्तार से चर्चा हुई। सुनवाई के दौरान अदालत का रुख साफ तौर पर संतुलन बनाए रखने का नजर आया।

कुत्तों के व्यवहार पर जजों की टिप्पणी

सुनवाई के दौरान जस्टिस नाथ ने कुत्तों के व्यवहार को लेकर अहम टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि कुत्ते इंसानों के डर को पहचान लेते हैं और कई बार इसी वजह से काटने की घटनाएं होती हैं। इस पर कुत्तों के पक्ष में दलील दे रहे एक वकील ने असहमति जताई।
इस पर जस्टिस नाथ ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि यह बात वह अपने व्यक्तिगत अनुभव के आधार पर कह रहे हैं, न कि किसी अनुमान के तौर पर।

शेल्टर की कमी पर गंभीर चिंता

याचिकाकर्ता के वकील ने अदालत को बताया कि राज्यों द्वारा दिए गए आंकड़ों में कहीं यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि नगर पालिकाएं कितने डॉग शेल्टर संचालित कर रही हैं। उन्होंने कहा कि देश में फिलहाल सिर्फ पांच सरकारी शेल्टर हैं और प्रत्येक की क्षमता लगभग 100 कुत्तों की है। ऐसे में बड़ी संख्या में आवारा कुत्तों को रखने के लिए पर्याप्त इंफ्रास्ट्रक्चर मौजूद नहीं है।

एनिमल वेलफेयर संगठनों की आपत्ति

एनिमल वेलफेयर की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता सीयू सिंह ने कुत्तों को हटाने या शेल्टर भेजने पर आपत्ति जताई। उन्होंने तर्क दिया कि कुत्तों को हटाने से चूहों की आबादी बढ़ सकती है, जिससे बीमारियों का खतरा पैदा होगा।
इस पर अदालत ने हल्के-फुल्के अंदाज में टिप्पणी करते हुए कहा— “तो क्या हमें बिल्लियां ले आनी चाहिए?”

पिछले आदेशों का जिक्र

अदालत ने याद दिलाया कि पिछले साल नवंबर में स्कूलों, अस्पतालों, बस स्टैंड, रेलवे स्टेशन और स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स जैसे सार्वजनिक स्थानों से आवारा कुत्तों को हटाने और उन्हें तय शेल्टर में भेजने के निर्देश दिए गए थे। इस मामले में बीते सात महीनों में अब तक छह बार सुनवाई हो चुकी है।

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सुनवाई में उठे अहम मुद्दे

  • आवारा कुत्तों की जिम्मेदारी किसकी है, इस पर स्पष्ट नीति की जरूरत

  • कुत्तों की गिनती और मॉनिटरिंग जरूरी, आखिरी सर्वे 2009 में हुआ था

  • रिहायशी इलाकों में सुरक्षा सुनिश्चित करने के उपाय

  • शेल्टर की क्षमता के अनुसार ही जानवरों को पकड़ने की व्यवस्था

  • पशु कल्याण और मानव सुरक्षा के बीच संतुलन जरूरी

कोर्ट का संतुलित रुख

जस्टिस मेहता ने स्पष्ट किया कि अदालत ने हर कुत्ते को सड़क से हटाने का आदेश नहीं दिया है। कुत्तों के साथ नियमों और कानून के तहत ही व्यवहार किया जाना चाहिए, लेकिन आम नागरिकों की सुरक्षा भी उतनी ही अहम है।

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