Indore News: दीपावली पर कार्बाइड गन बनी आंखों के लिए बड़ा खतरा, इंदौर पुलिस ने बिक्री रोकने के लिए शुरू किया विशेष अभियान

VIKASH KHALKHO

इंदौर। Indore News: दीपावली के पावन पर्व पर बच्चों और युवाओं में पटाखों का उत्साह रहता है, लेकिन यह शौक कई बार भारी पड़ सकता है। इन दिनों बाजार में मिलने वाली कार्बाइड गन (Carbide Gun), जिसे कार्बन गन भी कहा जा रहा है, आंखों की रोशनी के लिए एक गंभीर खतरा बन चुकी है। कैल्शियम कार्बाइड से चलने वाली यह देसी गन देखने में भले ही एक साधारण खिलौने जैसी लगे, लेकिन इसका विस्फोट बेहद खतरनाक होता है। पिछले साल मध्य प्रदेश में इस गन के इस्तेमाल से करीब 300 लोग आंखों की गंभीर चोट का शिकार हुए थे, जिनमें बड़ी संख्या बच्चों और किशोरों की थी। इस बार इंदौर पुलिस ने इस पर कड़ा रुख अपनाते हुए इसकी बिक्री रोकने के लिए बड़ा अभियान शुरू किया है।

कैसे काम करती है कार्बाइड गन और क्यों है खतरनाक?

पुलिस और विशेषज्ञों के अनुसार, कार्बाइड गन में कैल्शियम कार्बाइड का इस्तेमाल किया जाता है। जब यह पदार्थ नमी या पानी के संपर्क में आता है, तो इससे एसिटिलीन गैस बनती है। यह एक अत्यंत ज्वलनशील गैस है जो जरा सी चिंगारी या आग के संपर्क में आते ही तेज धमाका करती है।

  • आंखों पर सबसे बड़ा प्रहार: इस विस्फोट के दौरान निकलने वाली तेज गर्मी, दबाव और प्लास्टिक या धातु के टुकड़े सीधे चेहरे और आंखों को नुकसान पहुंचाते हैं।

  • केमिकल बर्न: कैल्शियम कार्बाइड के रासायनिक प्रभाव से आंखों की सतह और कॉर्निया गंभीर रूप से जल सकते हैं। डॉक्टरों के मुताबिक, गंभीर मामलों में आंख का पर्दा फट सकता है और पीड़ित की आंखों की रोशनी हमेशा के लिए जा सकती है।

पुलिस और प्रशासन का सख्त रुख

पिछले साल भोपाल, इंदौर, ग्वालियर, विदिशा और सागर जैसे जिलों में कार्बाइड गन से आंखें डैमेज होने के कई मामले सामने आए थे, जिसके बाद प्रशासन ने इस पर प्रतिबंध लगाया था। अब एक बार फिर इंदौर पुलिस कमिश्नरेट और क्राइम ब्रांच पूरी तरह अलर्ट मोड पर हैं। पटाखा व्यापारियों और दुकानदारों को सख्त निर्देश दिए गए हैं कि वे किसी भी स्थिति में कार्बाइड गन, कार्बाइड लैंप या इससे जुड़े उत्पादों की बिक्री न करें। साथ ही, दुकानदारों को हिदायत दी गई है कि यदि कोई बाहरी व्यक्ति ऐसी सामग्री की मांग करता है, तो इसकी सूचना तुरंत पुलिस को दी जाए।

नेत्र विशेषज्ञों ने भी माता-पिता से अपील की है कि वे बच्चों को इस खतरनाक खिलौने से दूर रखें, क्योंकि इसका कोई भी सुरक्षित इस्तेमाल संभव नहीं है।

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विकास कुमार खलखो एक डिजिटल पत्रकार, समाचार संपादक और SEO कंटेंट क्रिएटर हैं, जिन्हें पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया के क्षेत्र में एक दशक से अधिक का अनुभव है। उन्होंने BJMC, Master of Journalism (MJ) और M.Phil. (मीडिया स्टडीज़) की डिग्री हासिल की है और दबंग दुनिया, हमर छत्तीसगढ़ योजना, हरिभूमि, सन स्टार डेली न्यूज़ और छत्तीसगढ़ की आवाज़ जैसे प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों के साथ काम किया है। उन्हें हिंदी पत्रकारिता, ब्रेकिंग न्यूज़ कवरेज, SEO-फ्रेंडली कंटेंट राइटिंग, डिजिटल पब्लिशिंग, कंटेंट स्ट्रैटेजी, थंबनेल डिज़ाइन और सोशल मीडिया मैनेजमेंट में विशेष महारत हासिल है। उनका उद्देश्य सटीक, निष्पक्ष और विश्वसनीय पत्रकारिता के माध्यम से पाठकों तक प्रभावशाली समाचार पहुँचाना और साथ ही उच्च गुणवत्ता वाला डिजिटल कंटेंट तैयार करना है।
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