इंदौर। Nishaanebaz.com-Indore Traffic High Court Action: मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर खंडपीठ ने शहर की बदहाल यातायात व्यवस्था, पार्किंग की विकट समस्याओं और ई-चालान प्रणाली में आ रही गंभीर तकनीकी खामियों को लेकर अत्यंत सख्त रुख अपनाया है। न्यायमूर्ति सुबोध अभ्यंकर और न्यायमूर्ति जय कुमार पिल्लई की युगल पीठ ने इंदौर की ट्रैफिक व्यवस्था से जुड़ी जनहित याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए शहर के सभी प्रमुख चौराहों पर पर्याप्त पुलिसकर्मियों की तैनाती और गलत दिशा (Wrong Side) में वाहन चलाने वालों पर तत्काल सख्त कानूनी कार्रवाई के कड़े निर्देश दिए हैं। वहीं, पिछली सुनवाई के दौरान दिए गए निर्देशों पर सरकार की ओर से संतोषजनक जवाब न मिलने पर हाईकोर्ट ने नाराजगी जताते हुए राज्य के गृह विभाग के प्रमुख सचिव को व्यक्तिगत रूप से अदालत में हाजिर होकर जवाब दाखिल करने का हुक्म सुनाया है।
अदालत की सुनवाई के दौरान ई-चालान भुगतान ऐप की तकनीकी खामियों का मुद्दा भी प्रमुखता से उठा। याचिकाकर्ता के वरिष्ठ अधिवक्ता अजय बगाड़िया ने पीठ को अवगत कराया कि ई-चालान का भुगतान करते समय एप्लिकेशन पर प्रक्रिया पूरी होने से पहले ही सेशन एक्सपायर हो जाता है, जिससे आम जनता को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। इस पर संज्ञान लेते हुए हाईकोर्ट ने संबंधित विभाग से तकनीकी खामियों के निवारण और लंबित चालानों की विस्तृत रिपोर्ट तलब की है। इसके अतिरिक्त, अदालत ने यातायात सुधारों के लिए अतिरिक्त महाधिवक्ता राहुल सेठी की अध्यक्षता में एक उच्चस्तरीय समिति गठित करने का निर्देश दिया है और आवासीय भवनों के नक्शों में कम से कम दो पार्किंग स्थान अनिवार्य करने के प्रस्ताव पर इंदौर नगर निगम से जवाब मांगा है।
इंदौर की बदहाल ट्रैफिक व्यवस्था पर हाईकोर्ट सख्त, गृह सचिव तलब! 🚦
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— Nishaanebaz.com (@nishaanebaz_com) October 27, 2026
हाईकोर्ट ने मैदानी स्तर पर सख्त निर्देश जारी करते हुए कहा है कि शहर के व्यस्त और प्रमुख चौराहों पर कम से कम चार ट्रैफिक जवानों की मुस्तैदी सुनिश्चित की जाए। साथ ही, गलत दिशा में वाहन चलाकर दूसरों की जान जोखिम में डालने वाले चालकों पर तत्काल भारी जुर्माना लगाने अथवा उनके वाहनों को जब्त करने की कार्रवाई की जाए। पिछली सुनवाई के आदेशों का सही ढंग से अनुपालन न होने पर अदालत ने राज्य शासन के ढुलमुल रवैये पर कड़ी आपत्ति जताई और गृह सचिव को अगली सुनवाई में उपस्थित रहकर सरकार के प्रयासों का ब्योरा देने को कहा है। मामले की अगली सुनवाई 30 नवंबर 2026 से शुरू होने वाले सप्ताह में होना तय की गई है।
हाईकोर्ट के इस आक्रामक और सुधारात्मक रुख के बाद इंदौर पुलिस और नगर निगम प्रशासन में हड़कंप मच गया है। शहरवासियों को उम्मीद है कि अदालत की इस सख्त निगरानी से इंदौर की सड़कों पर लंबे समय से जारी ट्रैफिक की अराजकता, अवैध पार्किंग और ई-चालान की गड़बड़ियों पर लगाम लग सकेगी।