रायपुर। Nishaanebaz.com-Vishnu Deo Sai Cabinet Decisions: छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर स्थित मंत्रालय महानदी भवन में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की अध्यक्षता में आयोजित मंत्रिपरिषद की महत्वपूर्ण बैठक में राज्य के विकास, किसानों, आम उपभोक्ताओं और सरकारी कर्मचारियों के हित में कई बड़े व ऐतिहासिक फैसले लिए गए। कैबिनेट ने आगामी खरीफ विपणन वर्ष के लिए 15 नवंबर से राज्य भर में धान खरीदी शुरू करने, 200 यूनिट तक आधा बिजली बिल योजना को निरंतर जारी रखने, सरकारी कर्मचारियों के लिए कैशलेस चिकित्सा सुविधा और पर्यटन व अधोसंरचना विकास के लिए 500-500 करोड़ रुपये के विशेष मिशन शुरू करने के प्रस्तावों पर अपनी आधिकारिक मुहर लगा दी है।
साय कैबिनेट के फैसलों की जानकारी देते हुए बताया गया कि प्रदेश के किसानों से 3,100 रुपये प्रति क्विंटल की दर से धान खरीदा जाएगा, जिसके लिए प्रति एकड़ अधिकतम 21 क्विंटल की सीमा निर्धारित की गई है। इस बार खरीदी प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और सुचारू बनाने के लिए एग्रीस्टैक पोर्टल और बायोमेट्रिक प्रणाली का उपयोग किया जाएगा। राहत की बात यह है कि पोर्टल पर पहले से पंजीकृत किसानों को दोबारा अलग से पंजीयन कराने की आवश्यकता नहीं होगी। इसके अलावा, खरीदी व्यवस्था को सुगम बनाने के लिए राज्य में 360 नए धान उपार्जन केंद्र स्थापित किए गए हैं, जिसके बाद अब कुल 3,100 केंद्रों के माध्यम से खरीदी संपन्न होगी।

आम जनता और घरेलू बिजली उपभोक्ताओं को राहत देते हुए कैबिनेट ने ‘मुख्यमंत्री ऊर्जा राहत जन अभियान’ के तहत 200 यूनिट तक बिजली खपत पर हाफ बिजली बिल की रियायत को जारी रखने का बड़ा निर्णय लिया है। इस योजना को आगे बढ़ाने के लिए राज्य सरकार ने 500 करोड़ रुपये का बजटीय प्रावधान मंजूर किया है, जिससे प्रदेश के लाखों मध्यम और निम्न वर्ग के परिवारों पर आर्थिक बोझ कम होगा। इसके साथ ही शासकीय सेवकों के कल्याण के लिए कैशलेस चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने के निर्णय को भी हरी झंडी दी गई है, जिसकी विस्तृत गाइडलाइंस और अस्पतालों की सूची जल्द जारी की जाएगी।
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राज्य में बुनियादी ढांचे के विकास और रोजगार के नए अवसर सृजित करने के लिए कैबिनेट ने दो बड़े मिशनों को मंजूरी प्रदान की है। इसके तहत प्रदेश में पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए ‘मुख्यमंत्री पर्यटन विकास मिशन’ तथा शहरी व ग्रामीण इलाकों के कायाकल्प के लिए ‘मुख्यमंत्री अधोसंरचना मिशन’ का गठन किया जाएगा। इन दोनों ही मिशनों की अवधि पांच वर्ष निर्धारित की गई है और प्रत्येक मिशन के लिए 500-500 करोड़ रुपये की राशि स्वीकृत की गई है। सरकार के इन फैसलों से स्पष्ट है कि राज्य प्रशासन कृषि, जनकल्याण और बुनियादी ढांचे को एक साथ गति देने की दिशा में तेजी से काम कर रहा है।