अंबिकापुर। Nishaanebaz.com-Ambikapur Hospital Probe Demand: छत्तीसगढ़ के अंबिकापुर स्थित शासकीय मेडिकल कॉलेज अस्पताल में कथित वित्तीय अनियमितताओं और नियम विरुद्ध भर्तियों को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। मामले की गंभीर शिकायत प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल से करते हुए पूरे प्रकरण की निष्पक्ष विभागीय जांच और दोषियों पर कार्रवाई की मांग की गई है। शिकायतकर्ता राणा रणविजय सिंह ने ज्ञापन के साथ सूचना के अधिकार (RTI) से प्राप्त आधिकारिक दस्तावेज भी संलग्न किए हैं।
स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल को सौंपे गए शिकायत पत्र में मेडिकल कॉलेज अस्पताल के तत्कालीन प्रभारी अधीक्षक डॉ. आरसी आर्या पर गंभीर आरोप लगाए गए हैं। शिकायत में दावा किया गया है कि वर्ष 2024-25 में जीवन दीप समिति और स्वशासी समिति के बजट से अस्पताल के लिए विभिन्न निजी फर्मों से कुल 1,81,84,281 रुपये (1.81 करोड़ रुपये) की सामग्री खरीदी गई। आरोप है कि इस खरीदी प्रक्रिया में टेंडर नियमों की अनदेखी कर व्यापक वित्तीय गड़बड़ी की गई है।
शिकायत पत्र में अस्पताल में हुई भर्तियों को लेकर भी चौंकाने वाला खुलासा किया गया है। आरोप है कि स्वास्थ्य संस्था में 100 से अधिक कर्मचारियों को नियम विरुद्ध तरीके से रखा गया और इस बैकडोर एंट्री के एवज में प्रति अभ्यर्थी लगभग 40-40 हजार रुपये की अवैध वसूली की गई। इसके अलावा, आयुष्मान भारत योजना के तहत मिलने वाले इलाज और सरकारी भुगतान में भी बड़े पैमाने पर गोलमाल किए जाने का आरोप लगाया गया है।
इतना ही नहीं, अस्पताल के वाहनों और जनरेटर के नाम पर हुए खर्चों पर भी सवाल दागे गए हैं। RTI से प्राप्त आंकड़ों के हवाले से बताया गया कि जनवरी 2025 से नवंबर 2025 के बीच केवल डीजल-पेट्रोल के नाम पर 33,18,272 रुपये और जनवरी 2023 से नवंबर 2025 के दौरान वाहन मरम्मत पर 5,00,105 रुपये खर्च दिखाए गए हैं। शिकायतकर्ता का दावा है कि इन खर्चों के नाम पर भारी फर्जीवाड़ा हुआ है।
मामले की गंभीरता को देखते हुए स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल से मांग की गई है कि निष्पक्ष जांच पूरी होने तक डॉ. आरसी आर्या को वर्तमान पद से तत्काल पृथक किया जाए। साथ ही 3 सितंबर 2026 को जारी शासन के उस आदेश की समीक्षा करने का अनुरोध किया गया है जिसके तहत उन्हें डीन पद पर पदोन्नत किया गया है। दूसरी ओर, स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने स्पष्ट किया है कि प्राप्त दस्तावेजों और शिकायतों की गहनता से जांच कराई जाएगी तथा दोषी पाए जाने पर संबंधितों के खिलाफ कठोर दंडात्मक कार्रवाई होगी।






