Nana Patole Demands Dropdown List: ओपन-एंडेड सवालों से नहीं होगी सटीक गिनती; तेलंगाना-बिहार की तर्ज पर ड्रॉपडाउन सूची की मांग

VIKASH KHALKHO

रायपुर। Nishaanebaz.com-Nana Patole Censures Caste Census: महाराष्ट्र प्रदेश कांग्रेस कमेटी के पूर्व अध्यक्ष और वरिष्ठ कांग्रेस नेता नाना भाऊ पटोले ने केंद्र सरकार द्वारा प्रस्तावित जातिगत जनगणना के मौजूदा प्रारूप को पूरी तरह दोषपूर्ण और अव्यवहारिक करार दिया है। राजधानी रायपुर में आयोजित एक प्रेस वार्ता के दौरान उन्होंने आरोप लगाया कि जातिगत जनगणना को लेकर केंद्र की नीयत साफ नहीं है। इसके साथ ही उन्होंने वर्तमान प्रश्नावली को तत्काल प्रभाव से रद्द करने की मांग उठाई।

छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज और विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष चरणदास महंत की गरिमामयी उपस्थिति में पत्रकारों को संबोधित करते हुए नाना भाऊ पटोले ने कहा कि तेलंगाना और बिहार में अपनाई गई पारदर्शी पद्धति के आधार पर ही देश भर में जातिगत जनगणना कराई जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि प्रमाणित जातियों की एक ड्रॉपडाउन सूची (Dropdown List) तैयार कर नई प्रश्नावली का गठन किया जाए, जिससे प्रत्येक वर्ग की सही गिनती संभव हो सके।

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नाना भाऊ पटोले ने स्पष्ट किया कि राजनीतिक दलों, समाजशास्त्रियों और विशेषज्ञों से गहन विचार-विमर्श के बाद ही नई प्रश्नावली तैयार की जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि आगामी जनगणना के लिए अधिसूचित 40 प्रश्नों में से प्रश्न क्रमांक 10 यह साबित करने के लिए काफी है कि केंद्र सरकार सटीक आंकड़ों से बचना चाह रही है। इस सवाल में ओपन-एंडेड (खुला प्रारूप) विकल्प रखा गया है, जो विसंगतियां पैदा करेगा।

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उन्होंने प्रक्रियात्मक अंतर को समझाते हुए बताया कि ड्रॉपडाउन सूची में सरकार द्वारा मान्यता प्राप्त जातियों का पूर्व निर्धारित डेटा होता है, जिसमें से गणनाकार को केवल सही विकल्प चुनना होता है। इसके विपरीत, ओपन-एंडेड व्यवस्था में नागरिक अपनी जाति या उपजाति का जो भी नाम और स्पेलिंग बताएगा, गणनाकार उसे वैसा ही दर्ज कर लेगा। इससे बोलियों, उच्चारण और वर्तनी के अंतर के कारण एक ही जाति के हजारों अलग-अलग नाम दर्ज हो जाएंगे।

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कांग्रेस नेता ने चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि भारत में एक ही जाति विभिन्न क्षेत्रों में अलग-अलग क्षेत्रीय नामों और उपजातियों से जानी जाती है। यदि ड्रॉपडाउन सूची लागू नहीं की गई, तो जनगणना के आंकड़े पूरी तरह से अनुपयोगी हो जाएंगे और अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) की वास्तविक आबादी का सही आंकड़ा कभी सामने नहीं आ पाएगा। उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि मौजूदा प्रश्नावली में पिछड़ा वर्ग शब्द तक को शामिल नहीं किया गया है, जो सामाजिक न्याय के सिद्धांतों के खिलाफ है।

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विकास कुमार खलखो एक डिजिटल पत्रकार, समाचार संपादक और SEO कंटेंट क्रिएटर हैं, जिन्हें पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया के क्षेत्र में एक दशक से अधिक का अनुभव है। उन्होंने BJMC, Master of Journalism (MJ) और M.Phil. (मीडिया स्टडीज़) की डिग्री हासिल की है और दबंग दुनिया, हमर छत्तीसगढ़ योजना, हरिभूमि, सन स्टार डेली न्यूज़ और छत्तीसगढ़ की आवाज़ जैसे प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों के साथ काम किया है। उन्हें हिंदी पत्रकारिता, ब्रेकिंग न्यूज़ कवरेज, SEO-फ्रेंडली कंटेंट राइटिंग, डिजिटल पब्लिशिंग, कंटेंट स्ट्रैटेजी, थंबनेल डिज़ाइन और सोशल मीडिया मैनेजमेंट में विशेष महारत हासिल है। उनका उद्देश्य सटीक, निष्पक्ष और विश्वसनीय पत्रकारिता के माध्यम से पाठकों तक प्रभावशाली समाचार पहुँचाना और साथ ही उच्च गुणवत्ता वाला डिजिटल कंटेंट तैयार करना है।
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