Silver Price Crash : नई दिल्ली: कमोडिटी बाजार के इतिहास में सोमवार का दिन चांदी के लिए बेहद उतार-चढ़ाव भरा रहा। वैश्विक संकेतों और भू-राजनीतिक घटनाक्रमों के बीच चांदी की कीमतों ने पहले ₹2,54,174 प्रति किलोग्राम का सर्वकालिक उच्च स्तर छूकर इतिहास रचा, लेकिन इसके तुरंत बाद आई भारी गिरावट ने निवेशकों को चौंका दिया। महज एक घंटे के भीतर चांदी की कीमतें करीब ₹21,000 टूटकर ₹2,33,120 के स्तर पर आ गईं।![]()
क्यों आई कीमतों में इतनी बड़ी गिरावट?
बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, इस अप्रत्याशित गिरावट के पीछे तीन प्रमुख कारण रहे:
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शांति वार्ता के संकेत: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और यूक्रेन के राष्ट्रपति व्लादिमीर जेलेंस्की के बीच हुई सकारात्मक बातचीत से रूस-यूक्रेन युद्ध खत्म होने की उम्मीदें जगी हैं। इससे ‘सुरक्षित निवेश’ के रूप में चांदी की मांग अचानक कम हो गई।
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भारी मुनाफावसूली: अंतरराष्ट्रीय बाजार में चांदी जैसे ही पहली बार 80 डॉलर प्रति औंस के जादुई आंकड़े पर पहुंची, निवेशकों ने ऊंचे भाव पर जमकर मुनाफावसूली (Profit Booking) की, जिससे दाम फिसलकर 75 डॉलर के करीब आ गए।
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जोखिम लेने की धारणा: युद्ध के तनाव में कमी के संकेतों ने निवेशकों का ध्यान सुरक्षित धातुओं से हटाकर शेयर बाजार जैसे जोखिम भरे एसेट्स की ओर मोड़ दिया।
रिकॉर्ड ऊंचाई का सफर
गिरावट से पहले, घरेलू बाजार (MCX) पर चांदी के मार्च 2026 अनुबंध में जबरदस्त तेजी देखी गई थी। यह लगातार छठा सत्र था जब चांदी ने नया रिकॉर्ड बनाया। औद्योगिक मांग और वैश्विक स्तर पर सप्लाई की कमी के कारण चांदी इस साल की सबसे ज्यादा रिटर्न देने वाली संपत्ति बनकर उभरी है। साल 2025 की शुरुआत में महज 29 डॉलर पर रहने वाली चांदी ने दिसंबर के अंत तक 80 डॉलर तक का सफर तय किया।
सोने की चमक भी बरकरार
चांदी में मची अफरा-तफरी के बीच सोने की कीमतों में भी तेजी का रुख रहा। एमसीएक्स पर सोना ₹1,40,230 प्रति 10 ग्राम के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया। अंतरराष्ट्रीय बाजारों में सोने का वायदा भाव भी 4,536 डॉलर प्रति औंस के नए शिखर पर देखा गया। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले दिनों में बाजार में अस्थिरता बनी रह सकती है, इसलिए निवेशकों को सावधानी बरतने की जरूरत है।











