रीवा : रीवा में आज विंध्य के दिग्गज नेता पंडित श्रीनिवास तिवारी का 100वां जन्मदिन मनाया गया, लेकिन इस ऐतिहासिक दिन एक बेहद चौंकाने वाली तस्वीर सामने आई है। जिस पोते को अपने दादा की विरासत संभालनी थी, वह इस आयोजन से पूरी तरह दूर रहे। क्या उन पर कोई सियासी दबाव था या यह उनकी राजनीतिक मजबूरी?
एक तरफ जहाँ पूरा विंध्य स्वर्गीय श्रीनिवास तिवारी को नमन करने उमड़ पड़ा, वहीं उनके निवास पर बहू अरुणा तिवारी के साथ कांग्रेस के बड़े नेताओं का भारी जमावड़ा रहा। आलम यह था कि बैठने के लिए कुर्सियां तक कम पड़ गईं।
लेकिन, दूसरी तरफ, उनके ही पोते और बीजेपी विधायक सिद्धार्थ तिवारी के घर की कुर्सियां आज खाली पड़ी थीं। जो पोता अपने दादा की विरासत का सबसे बड़ा हकदार माना जाता था, वह जन्मदिन के भव्य आयोजन और प्रतिमा अनावरण में शामिल नहीं हुआ।
इस पूरे मामले पर पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने सिद्धार्थ तिवारी पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा, क्या उन्हें निमंत्रण की जरूरत थी? इतनी बड़ी विरासत उन्हें मिली है, क्या उनका इतना दायित्व भी नहीं बनता? उसे शर्म आनी चाहिए।
दिग्विजय सिंह ने इशारों-इशारों में कहा कि राजनीतिक दबाव के कारण सिद्धार्थ अपने ही दादा के जन्मदिन से दूर रहे। यह घटना दिखाती है कि राजनीति में विरासत से ज्यादा पार्टी की वफादारी अहम हो गई है। श्रीनिवास तिवारी के पोते बने शोले के ठाकुर,जो होकर भी अपने ही परिवार के इस ऐतिहासिक मौके पर कुछ नहीं कर पाए। सवाल यह है कि क्या यह सियासी मजबूरी आने वाले समय में सिद्धार्थ तिवारी के लिए एक बड़ी चुनौती बन जाएगी?













