Shaleya Shikshak Sangh CG Update : बचेली/दंतेवाड़ा : छत्तीसगढ़ शासन द्वारा फरवरी 2026 में जारी किए गए ‘छत्तीसगढ़ स्कूल शिक्षा सेवा शैक्षिक एवं प्रशासनिक संवर्ग नियम’ विवादों में घिर गए हैं। शालेय शिक्षक संघ दंतेवाड़ा ने इन नियमों पर गहरी आपत्ति जताते हुए इसे शिक्षकों के हितों के साथ खिलवाड़ बताया है। संगठन का आरोप है कि सरकार ने वास्तविक समस्याओं जैसे वेतन विसंगति और वरिष्ठता निर्धारण को सुलझाने के बजाय, शिक्षकों के पदोन्नति के अवसरों को और सीमित कर दिया है।
राजपत्र में प्रमुख विसंगतियां और आपत्तियां
जिला अध्यक्ष संतोष कुमार मिश्रा और प्रांतीय पदाधिकारियों ने नए राजपत्र के कई बिंदुओं पर तथ्यात्मक आपत्तियां उठाई हैं:
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एकीकृत वरिष्ठता सूची का नुकसान: नियमित और एल.बी. शिक्षकों की एकीकृत वरिष्ठता सूची बनाने से एल.बी. संवर्ग को नुकसान होगा, क्योंकि उन्हें नियमित शिक्षकों के बाद ही मौका मिल सकेगा।
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पदोन्नति कोटे में बदलाव: डाइट, बीटीआई और उपसंचालक स्तर के पदों पर पहले 100% पदोन्नति होती थी, जिसे अब बदलकर 50% सीधी भर्ती कर दिया गया है।
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बीईओ पदों पर फेरबदल: खंड शिक्षा अधिकारी के पदों में पदोन्नति और प्रतिनियुक्ति के अनुपात को बदलना भी शिक्षकों के लिए चिंता का विषय है।
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ट्राइबल संवर्ग की अनदेखी: उपसंचालक और संयुक्त संचालक जैसे उच्च पदों पर शिक्षा विभाग की तुलना में ट्राइबल संवर्ग को बहुत कम पद दिए गए हैं।
ट्राइबल संवर्ग के साथ ‘दोयम दर्जे’ का व्यवहार
प्रांतीय पदाधिकारी शैलेश सिंह ने आरोप लगाया कि संयुक्त संचालक के 8 पदों में से केवल 1 पद ट्राइबल संवर्ग को देना प्रशासनिक अन्याय है। उन्होंने कहा कि संविलियन के बाद समान अवसर मिलना शिक्षकों का अधिकार है, जिससे सरकार पीछे हट रही है।
सड़क से सदन तक संघर्ष की चेतावनी
प्रांतीय पदाधिकारी कुलदीप सिंह चौहान ने सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा कि जब शिक्षकों के अधिकारों को सीमित करना होता है, तो निर्णय तुरंत लिए जाते हैं, लेकिन वेतन विसंगति जैसे मुद्दों पर सरकार वर्षों तक मौन रहती है। संघ ने स्पष्ट किया है कि यदि राजपत्र में तत्काल संशोधन नहीं किया गया, तो शिक्षक समाज सड़क पर उतरकर निर्णायक संघर्ष और चरणबद्ध आंदोलन के लिए बाध्य होगा।













