PM Modi Somnath Visit : गुजरात : गुजरात के पावन सोमनाथ धाम में ‘सोमनाथ स्वाभिमान पर्व’ के अवसर पर आस्था, संस्कृति और राष्ट्रीय चेतना का ऐतिहासिक दृश्य देखने को मिला। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमनाथ मंदिर परिसर से देश को संबोधित करते हुए कहा कि यह पर्व भारत की सनातन परंपरा, सांस्कृतिक चेतना और आत्मसम्मान का जीवंत प्रतीक है।
‘जय सोमनाथ’ से हुआ संबोधन का शुभारंभ
प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन की शुरुआत ‘जय सोमनाथ’ के जयघोष से की, जिससे पूरा मंदिर परिसर गूंज उठा। उन्होंने कहा कि सोमनाथ स्वाभिमान पर्व केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि भारत के करोड़ों नागरिकों की आस्था, साधना और अटूट संकल्प का उत्सव है।
#WATCH | सोमनाथ, गुजरात: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा, “जब महमूद गजनी से लेकर औरंगजेब तक तमाम आक्रांता सोमनाथ पर हमला कर रहे थे तो उन्हें लग रहा था कि उनकी तलवार सनातन सोमनाथ को जीत रही है, वे मज़हबी कट्टरपंथी यह नहीं समझ पाए कि जिस सोमनाथ को वे नष्ट करना चाहते हैं उसके नाम… pic.twitter.com/LUkNCBDd6J
— ANI_HindiNews (@AHindinews) January 11, 2026
शौर्य यात्रा के बाद महादेव के चरणों में पूजा
रविवार सुबह प्रधानमंत्री मोदी ने गिर सोमनाथ में आयोजित भव्य शौर्य यात्रा में भाग लिया। इस दौरान उनके हाथों में भगवान शिव का डमरू दिखाई दिया, जो शौर्य, शक्ति और सांस्कृतिक गौरव का प्रतीक बना। इसके बाद उन्होंने सोमनाथ मंदिर में विधिवत पूजा-अर्चना की।
सोमनाथ केवल मंदिर नहीं, भारत की आत्मा
प्रधानमंत्री ने भावुक शब्दों में कहा कि सोमनाथ केवल एक तीर्थ स्थल नहीं है, बल्कि यह भारत की सांस्कृतिक आत्मा और आत्मविश्वास का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि तमाम आक्रमणों और चुनौतियों के बावजूद सोमनाथ हर युग में पुनः स्थापित हुआ और यही भारत की जीवटता की पहचान है।
आक्रांताओं की सोच पर पीएम का तीखा प्रहार
प्रधानमंत्री मोदी ने इतिहास का उल्लेख करते हुए कहा कि महमूद गजनी से लेकर औरंगजेब तक कई आक्रांताओं ने सोमनाथ को नष्ट करने की कोशिश की, लेकिन वे यह नहीं समझ पाए कि ‘सोमनाथ’ के नाम में ही ‘सोम’, यानी अमृत समाहित है। यह स्थान सदाशिव की उस चेतना का प्रतीक है जो कल्याण और शक्ति दोनों का स्रोत है।
पुनर्निर्माण और विजय का इतिहास
पीएम मोदी ने कहा कि सोमनाथ का इतिहास पराजय का नहीं, बल्कि पुनर्निर्माण, साहस और विजय का इतिहास है। यह स्थल भारत की सनातन चेतना का अमिट प्रमाण है, जो पीढ़ियों को मार्गदर्शन देता रहेगा।











