Sarzameen Review : नई दिल्ली | धर्मा प्रोडक्शन्स और स्टार स्टूडियोज की नई फिल्म ‘सरजमीं’ ओटीटी प्लेटफॉर्म जियो सिनेमा पर रिलीज़ हो चुकी है। कायोजे ईरानी द्वारा निर्देशित इस फिल्म में पृथ्वीराज सुकुमारन, काजोल और डेब्यू कर रहे इब्राहिम अली खान मुख्य भूमिकाओं में हैं। कुल 2 घंटे 17 मिनट की यह फिल्म एक सैन्य परिवार की जटिल भावनाओं और रिश्तों पर केंद्रित है।
फिल्म की कहानी कर्नल विजय मेनन (पृथ्वीराज सुकुमारन), उनकी पत्नी मेहेर (काजोल) और बेटे हरमन (इब्राहिम अली खान) के इर्द-गिर्द घूमती है। कर्नल मेनन एक अनुशासित और आदर्शवादी पिता हैं जो चाहते हैं कि उनका बेटा भी सेना में नाम कमाए। मगर हरमन आत्मविश्वास की कमी और हकलाने की समस्या से जूझ रहा है। मां मेहेर बेटे को दुनिया और पिता दोनों से बचाकर रखने की कोशिश करती हैं।
कहानी में मोड़ तब आता है जब दो आतंकवादियों को पकड़ने के बाद, कर्नल मेनन का बेटा आतंकवादियों द्वारा अगवा कर लिया जाता है। जब बेटा वापस लौटता है, तब उसका बर्ताव संदिग्ध लगता है। यहीं से फिल्म भावनाओं, शक और देशभक्ति के टकराव में उलझ जाती है।
कलात्मक पक्ष की बात करें तो काजोल ने मां के किरदार में गहरी छाप छोड़ी है। पृथ्वीराज का अभिनय भी संतुलित है, वहीं इब्राहिम के प्रदर्शन में संभावनाएं हैं लेकिन अनुभव की कमी भी साफ नज़र आती है।
फिल्म की पटकथा और निर्देशन में कुछ कमज़ोरियां हैं। देशभक्ति की भावनाओं को छूने की कोशिश जरूर की गई है, मगर गंभीरता से पकड़ नहीं बन पाई है। कुछ दृश्य प्रभावशाली हैं, मगर कहानी की गहराई और आर्मी की विश्वसनीयता में स्पष्टता का अभाव है।
फिल्म की शूटिंग हिमाचल प्रदेश के मंडी जिले के एक छोटे-से गांव झाना में की गई है, जो दर्शनीय तो है लेकिन कश्मीर जैसी लोकेशन का प्रभाव नहीं छोड़ता।
‘सरजमीं’ एक भावनात्मक पारिवारिक ड्रामा है जिसे एक बार देखा जा सकता है, विशेषकर काजोल और पृथ्वीराज की परफॉर्मेंस के लिए। मगर दर्शकों को इससे बहुत अधिक उम्मीदें नहीं लगानी चाहिए।











