MP News : रीवा मेडिकल कॉलेज : शिक्षिका के फर्जी सर्टिफिकेट का मामला हाईकोर्ट पहुंचा, एसपी को एफआईआर दर्ज करने के निर्देश

VIKASH KHALKHO

रीवा | रीवा का मेडिकल कॉलेज फिर सुर्खियों में है। इस बार मामला हाईकोर्ट तक पहुंचा, जहां एक महिला शिक्षक द्वारा पेश किए गए फर्जी बीमारी और फिटनेस सर्टिफिकेट का खुलासा हुआ।

मामले का संक्षिप्त विवरण:

  • रीवा निवासी अर्चना आर्या ने 2001 में शिक्षा कर्मी वर्ग-तीन के रूप में नियुक्ति पाई।
  • बीमारी के कारण वह 2002 से 2018 तक सेवा में अनुपस्थित रहीं।
  • 2018 में जब सेवा में वापस लौटने का प्रयास किया, उन्होंने 2006 का बीमारी सर्टिफिकेट और 2017 का फिटनेस सर्टिफिकेट कोर्ट में पेश किया।
  • कोर्ट ने जांच में पाया कि दोनों सर्टिफिकेट रीवा मेडिकल कॉलेज के मनोरोग विभाग के डॉ. प्रदीप कुमार के हस्ताक्षर से जारी हुए।
  • डीन डॉ. सुनील अग्रवाल ने कोर्ट को बताया कि 2006 में मनोरोग विभाग अस्तित्व में ही नहीं था, इसलिए 2006 का सर्टिफिकेट फर्जी था।

हाईकोर्ट का निर्णय:

  • सुप्रीम कोर्ट की एकलपीठ न्यायमूर्ति विवेक जैन ने मामले की सुनवाई की।
  • कोर्ट ने एसपी रीवा को निर्देश दिए कि फर्जी हस्ताक्षर करने वाले के खिलाफ अपराधिक प्रकरण दर्ज करें और 15 दिन में रिपोर्ट प्रस्तुत करें।
  • याचिका को यह कहते हुए खारिज कर दिया गया कि अर्चना आर्या की 15 साल की अनुपस्थिति के कारण नौकरी में वापसी उचित नहीं थी।
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विकास कुमार खलखो एक डिजिटल पत्रकार, समाचार संपादक और SEO कंटेंट क्रिएटर हैं, जिन्हें पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया के क्षेत्र में एक दशक से अधिक का अनुभव है। उन्होंने BJMC, Master of Journalism (MJ) और M.Phil. (मीडिया स्टडीज़) की डिग्री हासिल की है और दबंग दुनिया, हमर छत्तीसगढ़ योजना, हरिभूमि, सन स्टार डेली न्यूज़ और छत्तीसगढ़ की आवाज़ जैसे प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों के साथ काम किया है। उन्हें हिंदी पत्रकारिता, ब्रेकिंग न्यूज़ कवरेज, SEO-फ्रेंडली कंटेंट राइटिंग, डिजिटल पब्लिशिंग, कंटेंट स्ट्रैटेजी, थंबनेल डिज़ाइन और सोशल मीडिया मैनेजमेंट में विशेष महारत हासिल है। उनका उद्देश्य सटीक, निष्पक्ष और विश्वसनीय पत्रकारिता के माध्यम से पाठकों तक प्रभावशाली समाचार पहुँचाना और साथ ही उच्च गुणवत्ता वाला डिजिटल कंटेंट तैयार करना है।
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