निशानेबाज न्यूज़ डेस्क : रीवा के नवागत कलेक्टर नरेंद्र सूर्यवंशी ने पदभार ग्रहण करते ही अपनी कार्यशैली से अलग पहचान बना ली है। सर्किट हाउस में अधिकारियों की बैठक लेने के बाद उन्होंने पारंपरिक दफ्तर व्यवस्था से हटकर सीधे फील्ड में जाने का फैसला किया।
सरकारी गाड़ी नहीं, बस से पहुंचे गांव
कलेक्टर सूर्यवंशी ने अपने सरकारी वाहन का उपयोग करने के बजाय ट्रेवलर बस से अधिकारियों के साथ दूर-दराज के क्षेत्रों का दौरा किया। वे उत्तर प्रदेश सीमा से सटे डभौरा इलाके पहुंचे, जहां उन्होंने ग्रामीणों से सीधा संवाद स्थापित किया।
चौपाल लगाकर सुनी समस्याएं
डभौरा में कलेक्टर ने चौपाल लगाकर ग्रामीणों की समस्याएं सुनीं। उन्होंने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि वे केवल कागजी कार्यवाही तक सीमित न रहें, बल्कि मौके पर जाकर समस्याओं का समाधान सुनिश्चित करें।
स्कूल पहुंचकर बच्चों से संवाद
दौरे के दौरान कलेक्टर एक सरकारी स्कूल भी पहुंचे, जहां उन्होंने बच्चों से बातचीत की। उन्होंने शिक्षा व्यवस्था की जानकारी ली और बच्चों की पढ़ाई से जुड़े सवाल पूछे। अपने बीच कलेक्टर को देखकर बच्चे भी उत्साहित नजर आए।
अधिकारियों को दिए सख्त निर्देश
कलेक्टर ने अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए कि वे नियमित रूप से फील्ड विजिट करें और जनता की समस्याओं को प्राथमिकता के आधार पर हल करें। उन्होंने कहा कि जमीन पर उतरकर ही वास्तविक स्थिति को समझा जा सकता है।
प्रशासनिक बदलाव का संकेत
नरेंद्र सूर्यवंशी ने साफ संदेश दिया कि अब प्रशासन दफ्तरों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि गांव-गांव जाकर लोगों की समस्याओं का समाधान करेगा। उनकी इस पहल को प्रशासनिक सुधार की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है।











