Employment adjustment : ऊर्जांचल (सिंगरौली/सोनभद्र) : रोजगार समायोजन की मांग को लेकर सोमवार को ऊर्जांचल का माहौल उस समय गरमा गया जब सैकड़ों ग्रामीणों ने एनसीएल बीना परियोजना के अंतर्गत कार्यरत आउटसोर्सिंग कंपनी ‘चेन्नई राधा’ के कैंप कार्यालय का घेराव किया। भाजपा नेता विनोद सिंह कुरुवंशी के नेतृत्व में जुटे प्रदर्शनकारियों ने स्थानीय युवाओं और ग्रामीणों को रोजगार में प्राथमिकता देने की पुरजोर मांग की। इस प्रदर्शन में बड़ी संख्या में महिलाएं भी शामिल हुईं, जिन्होंने कंपनी प्रबंधन के खिलाफ अपनी आवाज बुलंद की।
प्रदर्शनकारियों का मुख्य तर्क यह था कि परियोजना क्षेत्र से प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से प्रभावित होने के बावजूद स्थानीय लोगों को रोजगार से वंचित रखा जा रहा है। सुबह करीब 9 बजे शुरू हुए इस शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन में मोरवा मंडल के भाजपा कार्यकर्ता और सीमावर्ती गांवों के ग्रामीण शामिल हुए। ग्रामीणों का कहना है कि खनन गतिविधियों के कारण वे वर्षों से प्रदूषण और विस्थापन का दंश झेल रहे हैं, लेकिन जब लाभ देने की बारी आती है, तो कंपनी बाहरी लोगों को वरीयता देती है।
मौके पर मौजूद भाजपा नेता विनोद सिंह कुरुवंशी ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि चेन्नई राधा कंपनी का कैंप कार्यालय और खनन क्षेत्र मध्य प्रदेश की सीमा से सटे सिंगरौली जिले में स्थित है। भौगोलिक स्थिति के आधार पर सिंगरौली के मोरवा क्षेत्र के लोगों का रोजगार पर पहला हक बनता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि सीमावर्ती क्षेत्र के लोग वर्षों से इन भारी मशीनों और धूल-धक्कड़ के बीच रह रहे हैं, ऐसे में उन्हें नजरअंदाज करना अन्यायपूर्ण है।
हंगामे की सूचना मिलते ही बीना पुलिस चौकी और मोरवा थाना पुलिस की टीम मौके पर पहुंची। पुलिस की मौजूदगी में करीब तीन घंटे तक चले इस गतिरोध के बाद चेन्नई राधा कंपनी के अधिकारी राहुल सिंह प्रदर्शनकारियों से वार्ता करने पहुंचे। ग्रामीणों ने अपनी मांगों का मांग पत्र उन्हें सौंपा और चेतावनी दी कि स्थानीय लोगों के समायोजन में अब और देरी बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
कंपनी के अधिकारी राहुल सिंह ने प्रदर्शनकारियों की मांगों पर गंभीरता दिखाते हुए विचार करने के लिए 5 जनवरी तक का समय मांगा है। उन्होंने आश्वासन दिया कि प्रबंधन इस दिशा में सकारात्मक कदम उठाएगा। हालांकि, भाजपा नेता कुरुवंशी ने दो टूक शब्दों में कहा है कि यदि निर्धारित समय सीमा (5 जनवरी) तक ठोस निर्णय नहीं लिया गया, तो आंदोलन को और भी उग्र और व्यापक रूप दिया जाएगा, जिसकी जिम्मेदारी पूरी तरह कंपनी प्रशासन की होगी।













