Recipe: शारदीय नवरात्रि के सातवें दिन मां दुर्गा के सातवें स्वरूप मां कालरात्रि की पूजा की जाती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन मां को गुड़ या गुड़ से बनी मिठाइयों का भोग अर्पित किया जाता है। अगर आप भी सप्तमी पर घर में प्रसाद बनाना चाहते हैं, तो बेसन और गुड़ से तैयार होने वाली बर्फी एक अच्छा विकल्प हो सकती है।
बर्फी बनाने के लिए सामग्री
इस मिठाई के लिए आधा कप गेहूं का आटा, आधा कप बेसन, 3 से 4 बड़े चम्मच घी और एक कप बारीक कटा हुआ गुड़ लें। इसके अलावा एक चौथाई कप काजू पाउडर, आधा छोटा चम्मच इलायची पाउडर और 2 से 3 बड़े चम्मच दूध रखें। बर्फी को सजाने के लिए कटे हुए काजू-बादाम और चाहें तो चांदी का वर्क भी इस्तेमाल कर सकते हैं।
आटा और बेसन को अच्छी तरह भूनें
सबसे पहले कड़ाही में घी गर्म करें। इसमें गेहूं का आटा और बेसन डालकर धीमी से मध्यम आंच पर लगातार चलाते हुए भूनें। मिश्रण का रंग हल्का सुनहरा होने और अच्छी खुशबू आने तक इसे पकाएं। ध्यान रखें कि बेसन और आटे में कच्चापन न रहे, क्योंकि अच्छी तरह भुनने से ही बर्फी का स्वाद बेहतर बनता है।
गुड़ और मेवों से बढ़ाएं स्वाद
जब आटा और बेसन अच्छी तरह भुन जाएं, तो गैस बंद कर दें और मिश्रण को थोड़ा ठंडा होने दें। अब इसमें बारीक कटा गुड़ डालकर मिलाएं। बची हुई गर्माहट से गुड़ पिघलने लगेगा। इसके बाद काजू पाउडर और इलायची पाउडर डालकर सभी चीजों को अच्छी तरह मिलाएं। अगर मिश्रण ज्यादा सूखा लगे, तो थोड़ा-थोड़ा दूध डालें। ध्यान रखें कि मिश्रण बहुत पतला न हो जाए।
ट्रे में जमाकर काट लें बर्फी
अब एक ट्रे या प्लेट पर हल्का घी लगाएं और तैयार मिश्रण को उसमें डालकर बराबर फैला दें। ऊपर से कटे हुए काजू-बादाम डालकर हल्के हाथ से दबाएं। जमने के बाद मनचाहे आकार में काट लें। मां कालरात्रि को भोग लगाने के लिए बेसन-गुड़ की बर्फी तैयार है।
बर्फी बनाते समय इन बातों का रखें ध्यान
बेसन और आटे को बराबर मात्रा में लेने से बर्फी का स्वाद संतुलित रहता है। इन्हें धीमी आंच पर लगातार चलाते हुए भूनें, ताकि मिश्रण जले नहीं। गुड़ को बहुत तेज गर्म मिश्रण में डालने से वह जरूरत से ज्यादा पिघल सकता है या घी अलग हो सकता है। इसलिए मिश्रण को थोड़ा ठंडा करने के बाद ही गुड़ मिलाएं। दूध भी एक साथ डालने के बजाय जरूरत के अनुसार थोड़ा-थोड़ा मिलाएं, ताकि बर्फी की बनावट सही रहे।
