Ravana Dahan 2025 : रायपुर। दशहरे के दिन रावण दहन के बाद पान खाने की परंपरा लोगों में बेहद लोकप्रिय है। इसके पीछे एक प्राचीन कथा जुड़ी है। कहा जाता है कि रावण से युद्ध जीतने के बाद भगवान राम की वानर सेना ने पान के पत्ते खाकर जीत का जश्न मनाया था। तभी से विजयादशमी पर पान का सेवन शुभ माना जाने लगा। यह परंपरा न केवल धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व रखती है बल्कि स्वास्थ्य के लिए भी फायदेमंद मानी जाती है।
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Ravana Dahan 2025 : वैज्ञानिक दृष्टिकोण से देखा जाए तो पान के पत्ते में एंटी-बैक्टीरियल और एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण पाए जाते हैं, जो पाचन में मदद करते हैं और मुंह की दुर्गंध दूर करते हैं।
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मावा पान रेसिपी:सामग्री:
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पान के पत्ते
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मावा (खोया)
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चीनी पाउडर
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इलायची पाउडर
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पिस्ता और बादाम के टुकड़े
विधि:
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पान के पत्तों को साफ करके सुखा लें।
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मावा, चीनी पाउडर, इलायची पाउडर और पिस्ता-बादाम के टुकड़े मिलाकर मिश्रण तैयार करें।
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इस मिश्रण को पान के पत्तों पर रखें और पत्तों को मोड़ दें।
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पान तैयार है, इसे विजयादशमी पर आनंद के साथ खाया जा सकता है।
इस परंपरा के अनुसार पान खाने से न केवल जीत का उत्सव मनाया जाता है बल्कि स्वास्थ्य और सौभाग्य की कामना भी की जाती है।











