सिंगरौली : प्रदेश के सिंगरौली जिले में रेयर अर्थ एलिमेंट्स (REEs) यानी दुर्लभ मृदा तत्वों का विशाल भंडार खोजा गया है। यह भारत में पहली बार इतनी बड़ी मात्रा में इन खनिजों की उपलब्धता का खुलासा है।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि इससे मध्यप्रदेश क्रिटिकल मिनरल्स हब बन जाएगा और प्रदेश की ऊर्जा राजधानी के साथ अब यह राज्य क्रिटिकल मिनरल्स की राजधानी भी कहलाएगा।
खोज का महत्व
- सिंगरौली में मिली REEs की खदानें मोबाइल, इलेक्ट्रॉनिक्स, हथियार और ग्रीन एनर्जी के लिए अहम होंगी।
- भारत की चीन पर निर्भरता कम होगी।
- वैश्विक प्रतिस्पर्धा में भारत को आत्मनिर्भर बनाने में मदद मिलेगी।
खनिजों की मात्रा
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कोल इंडिया लिमिटेड के शोध अनुसार कोयले में औसतन 250 PPM और गैर-कोयला स्तर पर लगभग 400 PPM REEs पाए गए।
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भविष्य में कोयले की राख और ओवरबर्डन भी सैकेंडरी स्रोत बन सकते हैं।
केंद्रीय मंत्री की जानकारी
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केंद्रीय कोयला एवं खान मंत्री जी किशन रेड्डी ने संसद में कहा कि यह खोज भारत को ग्रीन एनर्जी, इलेक्ट्रॉनिक्स और रक्षा तकनीक में आत्मनिर्भर बनाएगी।
सेंटर ऑफ एक्सीलेंस और शोध
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राज्य सरकार ने प्रसंस्करण और शोध-अन्वेषण के लिए बेसिक इन्फ्रास्ट्रक्चर विकसित करने की दिशा में कदम उठाए हैं।
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इंडियन रेयर अर्थ लिमिटेड (IREL), भोपाल की इकाई का दौरा किया गया और सहयोग पर चर्चा हुई।
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REEs पर सेंटर ऑफ एक्सीलेंस स्थापित करने की संभावनाएं तलाशी जा रही हैं।
प्रमुख खनिज और उपयोग
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मुख्य खनिज: बास्टनेसाइट, जेनोटाइम, लोपेराइट, मोनाजाइट
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उपयोग क्षेत्र:
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कैमरा और स्मार्टफोन: डिस्प्ले, लेंस और प्रकाश उपकरण
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हथियार और अंतरिक्ष तकनीक: उच्च-प्रदर्शन चुम्बक
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पेट्रोलियम उद्योग: कैटेलिटिक कन्वर्टर्स और रिफाइनिंग
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इलेक्ट्रिक वाहन और पवन ऊर्जा संयंत्र: नियोडिमियम-आयरन-बोरॉन, सैमरियम-कोबाल्ट चुम्बक
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ऑटोमोबाइल: हाइब्रिड वाहन बैटरियों में लैथेनम आधारित मिश्र धातु
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इस्पात उद्योग: मिशमेटल से स्टील की गुणवत्ता में सुधार
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स्वास्थ्य क्षेत्र: MRI और PET इमेजिंग में गैडोलीनियम, ल्यूटेटियम और यिट्रियम
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