मुंबई : रणवीर सिंह की ‘धुरंधर’ आज सिनेमा घरों में तूफ़ान लेकर आई है। जैसे ही थिएटर में अंधेरा छाया और स्क्रीन पर लंबा-चौड़ा डिसक्लेमर उभरा, साफ समझ आ गया कि मेकर्स पहले ही कह रहे हैं—“कहानी को दिल से देखो, दिमाग बाद में लगाना।”और सच में, फिल्म शुरू होते ही झलक मिल गई कि आदित्य धर ने इस बार भी सिनेमाघरों में बारूद भर रखा है।
टाइम मशीन में बैठिए—1999 से 2001 के आतंक के दौर में वापसी
कहानी आपको सीधे उन दिनों में ले जाती है जब कंधार हाईजैक और संसद हमले ने भारत को हिला दिया था। इसी माहौल में IB चीफ अजय सान्याल ने ठान लिया था कि आतंक की जड़ें पाकिस्तान की जमीन पर जाकर काटनी होंगी।
और यहीं से जन्म लेता है—ऑपरेशन ‘धुरंधर’!इस मिशन की जान, उसका सबसे बड़ा हथियार—हमजा अली मज़ारी, यानी रणवीर सिंह।
ल्यारी टाउन में रणवीर की एंट्री—जहां हवा भी बारूद की होती है
फिल्म का फर्स्ट हाफ आपको पाकिस्तान के ल्यारी टाउन की गैंगवॉर गली में फेंक देता है—
जहाँ हर मोड़ पर मौत खड़ी मिलती है।
यहाँ हमजा की भिड़ंत होती है रहमान डकैत से, जिसे अक्षय खन्ना ने इतना खौफनाक बनाया है कि उनकी स्क्रीन मौजूदगी भर से रूह कांप जाती है।
विलेन गैंग—दानव, जिन्न और दहशत की फ़ौज
हमजा का सफर आसान नहीं।
उसके सामने आते हैं तीन तूफ़ान:
- मेजर इकबाल — दानव जैसे तेवर (अर्जुन रामपाल का सबसे खतरनाक गेटअप)
- चौधरी असलम — जिन्न जैसी दबंग एंट्री (संजय दत्त की दहाड़ थिएटर हिला देती है)
- रहमान डकैत — बर्फ जैसे ठंडे लेकिन अंदर से जलते हुए (अक्षय खन्ना की एक्टिंग शॉक देती है)
इन तीनों के बीच रणवीर का स्टैंड सच में धुरंधर साबित होता है।
फिल्मी मसाला + रॉ इमोशन + स्पाई थ्रिलर = धुरंधर एक्सपीरियंस
फिल्म सिर्फ थ्रिलर नहीं—एक देशभक्ति, अंडरवर्ल्ड, राजनीति और इंसानों के भीतर चल रहे युद्ध का विस्फोटक मिश्रण है।3 घंटे 34 मिनट लंबी फिल्म होने के बावजूद स्क्रीनप्ले आपको सीट से चिपकाए रखता है। पलक झपकी, और कहानी एक मोड़ आगे बढ़ चुकी।
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आदित्य धर ने फिर बजाया ट्रम्पकार्ड—’उरी’ के बाद फिर एक क्लासिक
आदित्य धर ने उरी में अपनी जो पहचान बनाई थी, धुरंधर में उसे दुगना कर दिया है।
यह फिल्म उनका मास्टर्डायरेक्शन है।एक्शन ऐसा कि हर पंच महसूस होता है, हिंसा इतनी कि कई बार दिल धड़कना भूल जाए।और सबसे खास—उन्होंने रणवीर की आक्रामक ऊर्जा को “काबू में रखकर”, उसे “तीव्रता” में बदला है।
जिसके कारण रणवीर का नया अवतार… जबरदस्त है।
रणवीर सिंह—कैरियर की सबसे धमाकेदार परफॉर्मेंस
रणवीर इस फिल्म में सिर्फ एक्टर नहीं—एक जिंदा ज्वालामुखी हैं।लंबे बाल, दाढ़ी, भीतर सुलगता गुस्सा, बाहर ठंडी मुस्कान—ये रोल शायद उन्हें ही मिलना था।26/11 वाले सीन में उनका इमोशनल आक्रोश…
थिएटर को पिन ड्रॉप साइलेंस में बदल देता है।
अक्षय खन्ना और संजय दत्त की धूम—विलेन भी ‘धुरंधर’
अक्षय खन्ना ने रहमान डकैत को आइकॉनिक निगेटिव रोल बना दिया है।संजय दत्त की एंट्री पर सीटियां बजना तय है।माधवन और रामपाल कहानी को और भारी, और खुरदरा बनाते हैं।
कमजोर दिल वालों के लिए नहीं
एक बात साफ—फिल्म खूनी है, हिंसा से भरी है, क्रूरता की हदें पार करती है।अगर आप सॉफ्ट फिल्में देखने वाले हैं, तो यह फिल्म आपके लिए नहीं।लेकिन अगर आप सिनेमाई रियलिज़्म और हार्डकोर एक्शन पसंद करते हैं—ये फिल्म आपका ब्लड प्रेशर बढ़ा देगी।
असली ‘धुरंधर’—वे गुमनाम हीरो जो हमारे लिए मरते हैं
फिल्म खत्म होने के बाद एहसास होता है कि हम कितने आराम से सोते हैं…और हमारे लिए किसी अनजान जमीन पर कोई एजेंट जान दांव पर लगा रहा होता है।वे चेहरे जिन्हें देश पहचानता भी नहीं, जिनकी मौत पर एक लाइन की खबर भी नहीं छपती—फिल्म उन्हीं को सलाम करती है।
देखें या नहीं?
अगर आप बड़े पर्दे पर गन-पाउडर की महक, डार्क दुनिया का रोमांच, और देशभक्ति की कच्ची, जलती हुई रूह महसूस करना चाहते हैं—
तुरंत टिकट बुक करें।
अगर दिल कमजोर है—
दूर से नमस्ते करें।










