Raipur Housing Board Handover : रायपुर (16 फरवरी 2026): रायपुर विकास प्राधिकरण (RDA) और छत्तीसगढ़ हाउसिंग बोर्ड की नौ प्रमुख आवासीय कॉलोनियों को नगर निगम को सौंपने की योजना फिलहाल ठंडे बस्ते में जाती दिख रही है। हस्तांतरण का सैद्धांतिक निर्णय होने के बावजूद, शासन स्तर से विस्तृत नियमावली और दिशा-निर्देश जारी नहीं होने के कारण पूरी प्रक्रिया रुकी हुई है।
सर्वे में सामने आ सकती हैं बड़ी खामियां
नगर निगम प्रशासन का स्पष्ट कहना है कि विस्तृत गाइडलाइन मिलने के बाद ही तीनों एजेंसियां (निगम, आरडीए और हाउसिंग बोर्ड) संयुक्त सर्वे करेंगी। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, इन कॉलोनियों में बुनियादी ढांचा काफी पुराना हो चुका है:
- पाइपलाइन: अधिकांश कॉलोनियों में जलापूर्ति का नेटवर्क 15 से 20 वर्ष पुराना है, जिसमें लगातार लीकेज की समस्या बनी रहती है।
- सड़कें और नालियां: आंतरिक सड़कों की ऊपरी परत उखड़ चुकी है और ड्रेनेज सिस्टम कई जगहों पर पूरी तरह जर्जर हो चुका है।
- स्ट्रीट लाइट और उद्यान: 100 से अधिक पार्कों की हालत खराब है और लाइटिंग नेटवर्क को बड़े स्तर पर मरम्मत की जरूरत है।
निगम पर बढ़ेगा वित्तीय और मानव संसाधन का बोझ
हैंडओवर के बाद इन कॉलोनियों की सफाई, उद्यानों के रखरखाव और स्ट्रीट लाइट की जिम्मेदारी सीधे नगर निगम पर आ जाएगी। अधिकारियों के अनुसार, इसके लिए अतिरिक्त सफाई कर्मियों, पंप ऑपरेटरों और इलेक्ट्रिशियनों की भारी फौज की जरूरत होगी। जर्जर अधोसंरचना के सुधार के लिए करोड़ों रुपये के बजट का प्रविधान करना होगा, जो निगम की वर्तमान वित्तीय स्थिति के लिए एक बड़ी परीक्षा साबित हो सकती है।
क्या कहते हैं जिम्मेदार?
नगर निगम रायपुर के अपर आयुक्त कृष्णा खटिक के अनुसार, “हैंडओवर की प्रक्रिया शासन के आदेश पर निर्भर है। नियमावली आने के बाद ही हम तकनीकी परीक्षण कर वास्तविक स्थिति का आकलन करेंगे और मरम्मत का एस्टीमेट तैयार किया जाएगा।”













