Wednesday, August 19, 2026
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Gharghoda ODF Scam: उपयोगिता प्रमाण पत्र से पहले ही मन गया ‘ओडीएफ उत्सव’; देखें घरघोड़ा में कैसे हुआ गुणवत्ता से खिलवाड़

Gharghoda ODF Scam: गौरी शंकर गुप्ता/घरघोड़ा। छत्तीसगढ़ में स्वच्छता और ग्रामीण विकास के बड़े-बड़े दावों के बीच रायगढ़ जिले के घरघोड़ा क्षेत्र से एक बेहद चौंकाने वाली और चिंताजनक जमीनी हकीकत सामने आई है। शासन-प्रशासन द्वारा जिन गांवों को ‘ओडीएफ’ (खुले में शौच मुक्त) घोषित कर वहां बड़े तामझाम के साथ ‘ओडीएफ उत्सव’ मना दिया गया है, उन गांवों के अधिकांश लोग आज भी खुले में शौच जाने को मजबूर हैं। क्षेत्र में स्वच्छ भारत मिशन के तहत बनाए गए शौचालयों में बड़े पैमाने पर बरती गई औपचारिकता और निहायत ही गुणवत्ता विहीन निर्माण कार्य के कारण ग्रामीणों के बीच भारी आक्रोश देखा जा रहा है।

बिना नींव की खड़ी कर दी दीवारें, तकनीकी मापदंडों का उड़ाया गया मजाक

स्थानीय ग्रामीणों से मिली जानकारी के अनुसार, पूर्व में संचालित ‘निर्मल ग्राम योजना’ की तर्ज पर ही यहां भी कागजी खानापूर्ति करने के लिए आनन-फानन में शौचालयों का ढांचा खड़ा कर दिया गया। निर्माण एजेंसियों ने भारी लापरवाही बरतते हुए महज एक ही दिन में थोड़ी सी जमीन खोदकर बिना मजबूत नींव के सुलभ शौचालय की दीवारें खड़ी कर दीं। इसके अलावा, सोख्ता (टंकी) के निर्माण में लंबाई, चौड़ाई और गहराई के तय तकनीकी मापदंडों और नियमों का खुलेआम उल्लंघन किया गया है। हद तो यह है कि कई शौचालयों की टंकियों को सीमेंट के पक्के ढक्कन से ढंकने के बजाय सामान्य पत्थरों से ही ढांक दिया गया है। ग्रामीणों का कहना है कि यह घटिया ढांचा कभी भी भरभरा कर गिर सकता है, और इसी आकस्मिक दुर्घटना की आशंका के चलते लोग इन शौचालयों के भीतर जाने से कतरा रहे हैं।

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पानी, पाइपलाइन और सोख्ता की अव्यवस्था; केवल उत्सव मनाने पर रहा जोर

ग्राउंड रिपोर्ट के अनुसार, इन नवनिर्मित शौचालयों में न तो पानी की कोई स्थाई व्यवस्था की गई है और न ही सोख्ता व पाइपलाइन का सही तरीके से विस्तार किया गया है। इन बुनियादी सुविधाओं के अभाव में किसी भी शौचालय का व्यावहारिक रूप से उपयोग किया जाना संभव ही नहीं है। आश्चर्य की बात यह है कि जब गांवों में निर्माण कार्य चल रहा था, तब विभागीय अधिकारियों के लगातार दौरे हो रहे थे, लेकिन इसके बावजूद इस घटिया निर्माण पर किसी ने रोक नहीं लगाई। अब हालत यह है कि यह भ्रष्टाचार केवल एक-दो गांवों तक सीमित नहीं है, बल्कि क्षेत्र के एक के बाद एक कई गांवों से सरकारी दावों की पोल धीरे-धीरे खुलती जा रही है।

बिना उपयोगिता प्रमाण पत्र के गांवों को मान लिया ओडीएफ; उठ रहे गंभीर सवाल

सरकारी नियमों और स्थापित प्रशासनिक प्रक्रियाओं के अनुसार, किसी भी शौचालय निर्माण की पूर्णता और गुणवत्ता तभी वैध मानी जाती है, जब वह पूरी तरह से उपयोग में आने लायक हो और संबंधित विभाग द्वारा उसका ‘उपयोगिता प्रमाण पत्र’ (Utility Certificate) जारी कर दिया गया हो। परंतु घरघोड़ा क्षेत्र के कई गांवों में शौचालयों के चालू होने से पहले ही कागजी आंकड़ों को दुरुस्त करने के लिए जल्दबाजी में ओडीएफ उत्सव मना दिए गए। क्षेत्र के बुद्धिजीवियों और ग्रामीणों का कहना है कि धरातल पर बिना किसी वास्तविक उपयोग के गांवों को खुले में शौच मुक्त मान लेना पूरी तरह से बेमानी है। ग्रामीणों ने जिला प्रशासन से इस पूरे मामले की उच्च स्तरीय निष्पक्ष जांच कराने और घटिया निर्माण कराने वाले ठेकेदारों व जिम्मेदार अधिकारियों पर सख्त दंडात्मक कार्रवाई करने की मांग की है।

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