रायगढ़ में फिर हाथी के बच्चे की मौत, चट्टानों के बीच गिरने से गई मासूम की जान

Rahul Goshwami

रायपुर : छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जिले में हाथियों की लगातार हो रही मौतों का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। ताजा मामला घरघोड़ा विकासखंड अंतर्गत ग्राम कया के जंगल क्षेत्र से सामने आया है, जहां एक हाथी के बच्चे की दर्दनाक मौत हो गई। यह घटना वन्यजीव संरक्षण को लेकर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े कर रही है।

चट्टानों के बीच गिरने से गई शावक की जान

जानकारी के अनुसार, 27 जनवरी की शाम को ग्रामीणों ने जंगल क्षेत्र में एक हाथी के बच्चे को मृत अवस्था में पड़े देखा। प्रारंभिक जांच में सामने आया कि हाथी का शावक चट्टानों के बीच गिर गया था, जिससे उसकी मौके पर ही मौत हो गई। बताया जा रहा है कि शावक के गिरने के बाद हाथियों का पूरा दल रातभर मौके के आसपास मौजूद रहा।

रातभर शावक को बचाने की कोशिश करता रहा झुंड

स्थानीय लोगों के मुताबिक, शावक के गिरने के बाद हाथियों का झुंड लगातार चिंघाड़ता रहा। हाथियों ने अपने बच्चे को चट्टानों के बीच से निकालने की कई कोशिशें कीं, लेकिन दुर्गम स्थल और गहराई अधिक होने के कारण वे सफल नहीं हो सके। जंगल में पूरी रात एक दर्दनाक दृश्य बना रहा।

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रात में नहीं पहुंच सका वन अमला

ग्रामीणों से सूचना मिलने के बाद वन विभाग की टीम तत्काल रवाना हुई, लेकिन रात का समय, दुर्गम इलाका और आसपास हाथियों की मौजूदगी के कारण घटनास्थल तक पहुंचना संभव नहीं हो पाया। सुरक्षा कारणों से वन अमले को सुबह तक इंतजार करना पड़ा।

पोस्टमार्टम के बाद शव का किया गया अंतिम संस्कार

डीएफओ रायगढ़ ने जानकारी दी कि 28 जनवरी की सुबह वन अमला आरक्षित वन कक्ष क्रमांक 1310 पहुंचा। निरीक्षण में मृत हाथी शावक नर पाया गया। नियमानुसार पोस्टमार्टम की प्रक्रिया पूरी करने के बाद हाथी के शव को जला दिया गया।

ग्रामीणों को किया गया अलर्ट

शावक की मौत के बाद हाथियों का दल आक्रामक व्यवहार कर सकता है। इसे देखते हुए वन विभाग ने आसपास के ग्रामीणों को अलर्ट जारी किया है। लोगों से हाथियों की आवाजाही वाले क्षेत्रों में न जाने, जंगल से दूरी बनाए रखने और किसी भी गतिविधि की तुरंत सूचना वन विभाग को देने की अपील की गई है।

वन्यजीव संरक्षण पर फिर सवाल

रायगढ़ जिले में लगातार हो रही हाथियों की मौतें वन्यजीव संरक्षण की चुनौती को उजागर कर रही हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि जंगलों में प्राकृतिक खतरों के साथ-साथ मानव गतिविधियों के कारण भी हाथियों के लिए जोखिम बढ़ता जा रहा है।

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