Sunday, September 27, 2026
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Chit fund Fraud: 49.50 लाख की धोखाधड़ी: स्व-रोजगार के नाम पर 165 ग्रामीण महिलाओं को ठगने वाले अधिकारी धरे गए

Chit fund Fraud: गौरी शंकर गुप्ता/रायगढ़। रायगढ़ जिले में फरार और शातिर अपराधियों की धरपकड़ के लिए वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (SSP) श्री शशि मोहन सिंह के कड़े दिशा-निर्देशन में विशेष अभियान “ऑपरेशन क्लीन हंट” चलाया जा रहा है। इस अभियान के तहत धरमजयगढ़ पुलिस ने एक बहुत बड़ी कामयाबी हासिल की है। पुलिस टीम ने करीब 49.50 लाख रुपये की हाई-प्रोफाइल ‘फ्लोरा मैक्स’ चिटफंड धोखाधड़ी मामले में लंबे समय से फरार चल रहे कंपनी के दो मुख्य अधिकारियों को गिरफ्तार कर लिया है। पकड़े गए आरोपियों में श्याम सिंह राजपूत और बलराम बंजारा उर्फ बल्लू शामिल हैं, जिन्हें विधिवत गिरफ्तार कर माननीय न्यायालय द्वारा न्यायिक रिमांड पर जेल भेज दिया गया है।

स्व-रोजगार और अधिक मुनाफे का लालच देकर बनाई योजना

पुलिस से प्राप्त आधिकारिक जानकारी के मुताबिक, इस संगठित ठगी का शिकार धरमजयगढ़ क्षेत्र की बेहद गरीब और ग्रामीण पृष्ठभूमि की महिलाएं हुई हैं। ग्राम चैनपुर निवासी बाल कुमारी राठिया ने 05 दिसंबर 2024 को थाना धरमजयगढ़ में इस धोखाधड़ी की लिखित शिकायत दर्ज कराई थी।

शिकायत के अनुसार, फ्लोरा मैक्स कंपनी के संचालकों ने आर्थिक रूप से कमजोर ग्रामीण महिलाओं को स्व-रोजगार देने, दुकानें खुलवाने और अधिक मुनाफा कमाने का लालच दिया था। इसके बाद आरोपियों ने 10-10 महिलाओं का समूह बनाकर कुल 165 महिलाओं को बैंकों से 30-30 हजार रुपये का लोन (ऋण) दिलवाया। इन पैसों को कंपनी के संचालकों ने अपने पास जमा करा लिया और धरमजयगढ़ के नीचेपारा में ब्रांच खोलकर दुकानें संचालित कराने लगे।

आय पर किया कब्जा और महिलाओं पर लादा कर्ज का बोझ

इसके साथ ही, आरोपियों ने ग्रामीण महिलाओं को यह प्रलोभन दिया था कि इस व्यवसाय के बदले प्रत्येक महिला को प्रति माह ₹2,700 का निश्चित भुगतान किया जाएगा। हालांकि, दुकानों से होने वाली प्रतिदिन की पूरी आय को मुख्य डायरेक्टर अखिलेश सिंह स्वयं अपने पास रख लेता था।

परिणामस्वरूप, कंपनी ने कुछ समय बाद महिलाओं को मासिक राशि देना पूरी तरह बंद कर दिया। इसके विपरीत, जिन गरीब महिलाओं के नाम पर बैंक से लोन लिया गया था, उन पर बैंकों की किश्तें चुकाने का अतिरिक्त आर्थिक बोझ आ गया। पुलिस जांच में यह स्पष्ट हुआ कि आरोपियों ने चैनपुर, सिथरा, जबगा और जमाबीरा गांव की कुल 165 भोली-भाली महिलाओं से लगभग ₹49.50 लाख रुपये की सुनियोजित ठगी को अंजाम दिया है।

पूर्व में एजेंट मंजू चौहान सहित कई अन्य पर हो चुकी है कार्रवाई

इस गंभीर मामले में धरमजयगढ़ पुलिस ने तत्परता दिखाते हुए शुरुआत में ही कंपनी की स्थानीय एजेंट मंजू चौहान को गिरफ्तार कर सलाखों के पीछे भेज दिया था। पुलिस ने उसके पास से स्कूटी, रसीदें, रजिस्टर और बैंक लोन से जुड़े अहम दस्तावेज बरामद किए थे।

इसके अलावा, विवेचना के दौरान पुलिस को पता चला कि कंपनी के मुख्य डायरेक्टर अखिलेश सिंह, राजू सिंह और गुड़िया देवी राजपूत पहले से ही जिला कोरबा के एक अन्य धोखाधड़ी मामले में जेल में बंद हैं। पुलिस ने उन सभी की औपचारिक गिरफ्तारी दर्ज कर ली थी। हालांकि, सह-डायरेक्टर श्याम सिंह राजपूत और बलराम बंजारा लगातार पुलिस को चकमा देकर फरार चल रहे थे, जिनके खिलाफ पुलिस पहले ही कोर्ट में चार्जशीट पेश कर चुकी थी।

जांजगीर और खरसिया से दबोचे गए दोनों मुख्य फरार आरोपी

लंबे समय से फरार इन दोनों आरोपियों को पकड़ने के लिए धरमजयगढ़ पुलिस लगातार जाल बिछा रही थी। अंततः, मुखबिर की सटीक सूचना पर पुलिस ने दबिश देकर श्याम सिंह राजपूत (उम्र 50 वर्ष) को उसके गृह ग्राम हथनेवरा (जिला जांजगीर-चांपा) और बलराम बंजारा उर्फ बल्लू (उम्र 36 वर्ष) को खरसिया क्षेत्र से घेराबंदी कर हिरासत में ले लिया। पूछताछ में दोनों ने अपना गुनाह कबूल कर लिया है।

इस बड़ी कामयाबी पर रायगढ़ एसएसपी श्री शशि मोहन सिंह ने जिले के नागरिकों को आश्वस्त करते हुए अपना कड़ा संदेश जारी किया है। उन्होंने साफ लहजे में कहा है कि:

“निवेश और रोजगार के नाम पर आम जनता की गाढ़ी कमाई और खून-पसीने का पैसा हड़पने वाले किसी भी संगठित गिरोह को बख्शा नहीं जाएगा। रायगढ़ पुलिस ऐसे आर्थिक अपराधियों के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति पर काम कर रही है और ‘ऑपरेशन क्लीन हंट’ के तहत फरार आरोपियों के विरुद्ध यह सख्त कार्रवाई आगे भी जारी रहेगी।”

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