Raigarh Brother Murder Case : रायगढ़। रिश्तों के कत्ल और जमीन के विवाद की एक दुखद परिणति में, रायगढ़ के अपर सत्र न्यायाधीश अभिषेक शर्मा ने आरोपी खेमराज यादव को अपने ही सगे छोटे भाई की हत्या का दोषी पाया है। न्यायालय ने आरोपी को आजीवन कारावास (Umarqaid) की सजा सुनाई है और अर्थदंड से भी दंडित किया है।
विवाद की जड़: महुआ का एक पेड़
यह मामला धरमजयगढ़ थाना क्षेत्र के ग्राम रामपुर का है। पुलिस और अभियोजन पक्ष के अनुसार, मृतक पीतांबर यादव और आरोपी खेमराज यादव सगे भाई थे। हालांकि, उनके बीच जमीन का बंटवारा पहले ही हो चुका था, लेकिन कुधरी डॉड़ स्थित एक महुआ पेड़ के मालिकाना हक को लेकर खेमराज अक्सर अपने छोटे भाई से विवाद करता था।
घटनाक्रम: महुआ बीनते समय हुआ हमला
घटना के दिन मृतक पीतांबर यादव अपनी पत्नी, पुत्र मनोज यादव और अन्य बच्चों के साथ महुआ बीनने गए थे। तभी आरोपी खेमराज वहां पहुँचा और चिल्लाते हुए बोला— “महुआ को मत उठाओ, नहीं तो पुराना बदला लूँगा और सबको जान से मार दूँगा।” विवाद इतना बढ़ा कि खेमराज ने आवेश में आकर अपने छोटे भाई पीतांबर के पेट में चाकू से हमला कर दिया। घाव इतना गहरा था कि पीतांबर ने घटनास्थल पर ही दम तोड़ दिया।
न्यायालय का फैसला और सजा
तत्कालीन विवेचना अधिकारी उपनिरीक्षक राम आधार उपाध्याय ने मामले की गहराई से जांच की और चश्मदीद गवाहों (मृतक के बच्चों) के बयान दर्ज किए। अपर लोक अभियोजक राजेश सिंह ठाकुर ने न्यायालय में ठोस सबूत पेश किए।
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धारा: आरोपी को आईपीसी की धारा 302 (हत्या) के तहत दोषी माना गया।
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सुनवाई: घरघोड़ा स्थित अपर सत्र न्यायालय ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद यह माना कि आरोपी ने पूर्व नियोजित तरीके से जघन्य अपराध किया है।
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परिणाम: न्यायालय ने खेमराज यादव को शेष प्राकृतिक जीवन के लिए जेल भेजने का आदेश दिया।











