Monday, October 5, 2026
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Pharasgaon News: गायता जोहरनी : आदिवासी संस्कृति और परंपरा का अनोखा पर्व, गट्टीपलना में ब्लॉक स्तरीय आयोजन, हजारों समाजजन हुए शामिल

Pharasgaon News:
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Pharasgaon News: रामकुमार भारद्वाज/ फरसगांव :- बस्तर में निवासरत आदिवासी समाज आज भी अपने पुरखों की विशिष्ट रीति-रिवाज, परंपराओं और सांस्कृतिक विरासत को सहेजे हुए है। यही वजह है कि यहां मनाए जाने वाले प्रत्येक पर्व में प्रकृति, देवी-देवताओं और पूर्वजों के प्रति आस्था की झलक देखने को मिलती है। इन्हीं महत्वपूर्ण परंपराओं में नवाखानी और गायता जोहरनी पर्व का विशेष महत्व है। फरसगांव ब्लॉक में इस वर्ष ब्लॉक स्तरीय गायता जोहरनी पर्व का आयोजन ग्राम गट्टीपलना के पटेलपारा में किया गया, जहां हजारों की संख्या में समाजजन शामिल हुए।

फरसगांव ब्लॉक स्तरीय गायता जोहरनी पर्व इस वर्ष 4 अक्टूबर को ग्राम गट्टीपलना के पटेलपारा में हर्षोल्लास और पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ मनाया गया। आदिवासी समाज में गांव के गायता का विशेष स्थान होता है। गांव में होने वाले सामाजिक और धार्मिक कार्यों में गायता की महत्वपूर्ण भूमिका रहती है। जन्म, विवाह, सुख-दुख से लेकर कृषि कार्यों तक में गायता के निर्देश और परंपराओं का पालन किया जाता है। आदिवासी समाज का मुख्य व्यवसाय कृषि और पशुपालन है। परंपरा के अनुसार खेत में सबसे पहले बीज बोने की शुरुआत गायता द्वारा की जाती है, जिसके बाद ग्रामीण अपने खेतों में बीज बोते हैं। नई फसल तैयार होने के बाद सबसे पहले देवी-देवताओं और अपने पुरखों को नई फसल अर्पित की जाती है। इसके बाद नवाखानी महापर्व और फिर गायता जोहरनी पर्व मनाने की परंपरा है।

गोंडवाना समाज समन्वयक समिति फरसगांव के ब्लॉक अध्यक्ष छेरकु राम नेताम ने बताया कि गायता जोहरनी पर्व के दौरान नई फसल से विभिन्न प्रकार के पकवान और भोजन तैयार कर सबसे पहले देवी-देवताओं को अर्पित किया जाता है। इसके बाद समाज के लोग सामूहिक भोज करते हैं और पारंपरिक गीत एवं नृत्य प्रस्तुत कर अपनी संस्कृति का उत्सव मनाते हैं। इस वर्ष ग्राम गट्टीपलना में ब्लॉक स्तरीय आयोजन होने के कारण बड़ी संख्या में समाज के लोग यहां पहुंचे।
गायता जोहरनी पर्व में शामिल होने के लिए विभिन्न गांवों से पारंपरिक नर्तक दल भी पहुंचे। रंग-बिरंगी और पारंपरिक मूल वेशभूषा में सजे समाज के लोगों ने मांदरी नृत्य, रेला नृत्य, नगाड़ा और ढोल की थाप पर पारंपरिक गीतों की प्रस्तुति दी। नृत्य और संगीत की इन प्रस्तुतियों ने पूरे आयोजन में उत्साह और उमंग भर दिया।

पारंपरिक वेशभूषा में पहुंचे समाजजनों का कहना है कि आदिवासी समाज अपनी विशिष्ट संस्कृति, कला और परंपराओं के लिए अलग पहचान रखता है। इसी सांस्कृतिक विरासत को आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाने और जीवित रखने के उद्देश्य से वे पारंपरिक वेशभूषा में इस तरह के आयोजनों में शामिल होते हैं।

Pharasgaon News: इस दौरान संभागीय उपाध्यक्ष सुरेश मरकाम, संभागीय मीडिया प्रभारी महेश नाग, जिलाध्यक्ष मंगलू राम नेताम, फरसगांव आदिवासी समाज के ब्लॉक अध्यक्ष छेरकु नेताम, क्षेत्रीय अध्यक्ष सोनसाय नेताम, फरसगांव क्षेत्र से दयाराम नेताम, भानपुरी क्षेत्र से रामधार मरकाम, उपाध्यक्ष छेदी नेताम, सुकदेव मंडावी, पूर्व उपाध्यक्ष चमरा राम नेताम, ग्राम के गायता अनित राम नेताम, जिला पंचायत सदस्य जयलाल नाग, उग्रेश मरकाम, सुकालू राम मरकाम पार्षद फरसगांव जनक नेताम, गट्टीपलना सरपंच नरसिंह शोरी, हेमलाल नेताम, सुकलाल मरकाम समेत बड़ी संख्या में ब्लॉकभर के आदिवासी समाज के लोग मौजूद रहे।

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